पटना: विदेशों में जमा काले धन को वापस नहीं ला पाने को लेकर महागठबंधन की आलोचनाओं से घिरे उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सदस्य राम जेठमलानी ने आज कहा कि वह नरेंद्र मोदी और अरुण जेटली के हाथों धोखाधड़ी का शिकार हुए। जेठमलानी ने यहां कहा, मैंने देश के नेता के तौर पर नरेंद्र मोदी का प्रचार करके जो किया, उसका प्रायश्चित करने मैं आज यहां आया हूं। मैंने सोचा था कि भगवान ने उन्हें भारत को बचाने के लिए अपने औलिया के रूप में भेजा है। मैं कैसे धोखाधड़ी का शिकार हो गया। वह यहां वन रैंक वन पेंशन के लिए पूर्व-सैनिकों की मांग के सिलसिले में आए थे।
जेठमलानी ने कहा कि केंद्र में रही संप्रग सरकार और मौजूदा मोदी नीत सरकार, दोनों ने ही विदेशी पनाहगाहों से काले धन को वापस लाने के लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने काला धन रखने वाले लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं होने के लिए पी चिदंबरम और अरुण जेटली दोनों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया, अगर हम वाकई काला धन वापस लाना चाहते हैं तो पी चिदंबरम और अरुण जेटली दोनों को पहले गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। जेटली ने दोहरा कराधान बचाव संधि (डीएटीटी) की आड़ में सहारा लिया। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि जर्मनी की सरकार ने विदेश में काला धन रखने वाले 1400 लोगों के नाम बताए थे और जर्मनी की सरकार भारत सरकार के साथ निशुल्क सूचना साझा करने को भी तैयार थी लेकिन उसने शर्त लगाई थी कि सरकार की ओर से लिखित अनुरोध होना चाहिए।
उन्होंने कहा, मैंने भाजपा नेताओं को दो पंक्ति का पत्र लिखा था और उनमें से किसी ने पत्र पर दस्तखत नहीं किए। जेठमलानी के अनुसार विदेशी कर पनाहों में 1500 अरब डॉलर जमा हैं जो 90 लाख करोड़ रुपए के बराबर हैं। उन्होंने कहा कि सरकार देश में एक भी डॉलर वापस नहीं ला सकी है। अगर सरकार काला धन वापस लाने में सफल होती तो उसे ओआरओपी पर पूर्व-सैनिकों की मांगों को मानने में किसी आर्थिक समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने कहा, बिहार से शुरूआत होनी चाहिए। उन्हें हराइए। उन्होंने राम जेठमलानी को बेवकूफ बनाया है लेकिन बिहार की जनता मूर्ख नहीं बनेगी।