नई दिल्ली: आप सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा है कि सार्वजनिक व्यवस्था, पुलिस और जमीन से संबंधित मामलों को छोड़कर उपराज्यपाल अन्य मामलों के लिए महज नाममात्र के प्रमुख हैं। उपराज्यपाल, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के अलावा कथित सीएनजी फिटनेस घोटाला में दिल्ली सरकार की ओर से जांच के लिए गठित जांच आयोग (सीओआई) की शक्तियों को लेकर दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिल्ली के वरिष्ठ वकील डी. कृष्णन ने मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंत नाथ के समक्ष अपनी पेशकश रखी।
कृष्णन ने संविधान का हवाला देते हुए कहा, तीन अपवादों (सार्वजनिक व्यवस्था, पुलिस और जमीन) को छोड़कर एलजी महज नाममात्र के प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि संविधान के अंतर्गत मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह का मतलब है कि उपराज्यपाल या राज्यपाल अपने विवेकाधीन शक्तियों को छोड़कर उनके फैसलों को मानने के लिए बाध्य है। एसीबी और एलजी की शक्तियों पर केंद्र की ओर से जारी अधिसूचना को चुनौती देने के लिए दायर याचिकाओं में से एक दिल्ली सरकार ओर से दाखिल की गई है, जबकि सीओआई के गठन के खिलाफ दायर याचिकाओं में से एक केंद्र सरकार, अन्य की ओर से दायर की गई है। राज्य सरकार ने उपराज्यपाल नजीब जंग की ओर से 17 सितंबर को जारी ज्ञापन पत्र को भी चुनौती दी है जिसमें सभी अधिकारियों को केंद्र सरकार की ओर से अमान्य घोषित किए गए आप सरकार के उन आदेशों को नहीं मानने का निर्देश दिया गया था।