नई दिल्ली: रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा कि उनके मंत्रालय में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है। और जहां तक पिछले एक साल में हथियारों के अधिग्रहण की बात है तो इसमें किसी भी प्रकार की देरी नहीं हुई है। पर्रिकर इंडिया टीवी के शो आपकी अदालत में रजत शर्मा के सवालों का जवाब दे रहे थे।
पर्रिकर ने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने मुझे अपने मंत्रालय से संबंधित कोई विशेष दिशा नहीं दी है।’ उन्होंने कहा, ‘हम वैसे कभी पीएमओ से मदद ले लेते है जैसे वन रैंक वन पेंशन (OROP) मामला है जो कि वित्त और रक्षा मंत्रालय दोनों से जुड़ा है। लेकिन दूसरे मामलों में पीएमओ का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है।’ रक्षा मंत्री ने मीडिया में हथियारों के सौदे और अधिग्रहण में देरी को लेकर आई खबरों का खंडन किया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान हथियार के सौदागर जो मूल रूप से एजेंट थे उनके रक्षा सौदों में नेटवर्क था लेकिन अब उन्होंने अपनी कमाई खो दी है। हम उन पर कीमतों को कम करने का दबाव डाल रहे है और इससे वे खुद परेशान होने लगे है और तरह-तरह की बातें फैला रहे है।
पर्रिकर ने कहा, ‘मेरे कार्यकाल के दौरान रक्षा सौदों में किसी भी तरह की कोई अनावश्यक देरी नहीं की गई। पर्रिकर ने कहा कि मैं एक अच्छा बजट प्लानर हूं और हम अगले 10 वर्षों में अधिग्रहण के लिए योजना बना रहे है तो कुल मिलाकर हम एक कदम आगे है पीछे नहीं।’
रक्षा तैयारियों की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर रक्षा मंत्री ने कहा कि अगर कोई देश हम पर हमला करता है तो हम निश्चित रूप से उनको जवाब देंगे। लेकिन हमें एक कदम आगे बढ़ना है। अभी हम काफी मजबूत है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम दूसरों को कुचल देंगे या दूसरों के खिलाफ दादागिरी करेंगे। हमें इसकी जरूरत नही है, लेकिन हमें अपनी ताकत को मजबूत करने की जरूरत है और यह एक ही दिन में नहीं किया जाता है। कोई इंसान जिम में एक ही दिन शारीरिक व्यायाम करके सिक्स और एट पैक एब्स नहीं पा सकता।
वहीं, पर्रिकर ने पठानकोट हवाई हमले से से जुड़े सवाल पर कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि उसमें कोई देरी हुई है। सेना, रक्षा क्षेत्र के पूरे नियंत्रण में थी। संयुक्त अभियान में एनएसजी और सेना ने सभी आतंकवादियों को मार गिराया था।