नई दिल्ली: दाल की मांग एवं आपूर्ति में अंतर से कीमतों में तेजी से चिंतित वाणिज्य मंत्रालय आने वाले महीनों में स्थिति से निपटने के लिये आयातकों की रणनीति को लेकर उनके साथ कल बैठक करेगा।
एक अधिकारी ने कहा कि बैठक की अध्यक्षता वाणिज्य सचिव करेंगे। इसमें उपभोक्ता मामलों तथा कृषि मंत्रालय के सचिव भी भाग लेंगे। निजी व्यापार से मिली राय के आधार पर सरकार स्थिति से निपटने के लिये वर्ष की शेष अवधि में सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा दाल के आयात की मात्रा के बारे में निर्णय करेगी।
बैठक में इस बात पर विचार किया जाएगा कि भारत ऐसे समय विदेशी बाजार से कितनी मात्रा में दाल का आयात कर सकता है जहां स्वयं दाल की आपूर्ति सीमित है। सूखे के कारण म्यांमार, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में उत्पादन में तीव्र गिरावट दर्ज की गई है।
घरेलू उत्पादन कम होने से दाल की कीमतें तेजी पर हैं। महंगाई की बड़ी वजह कमजोर मानसून की वजह से फसल वर्ष (जुलाई-जून) 2014-15 में उत्पादन में 20 लाख टन की कमी है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार निजी कंपनियों ने चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-सितंबर के दौरान 22.3 लाख टन दलहन का आयात किया जबकि सार्वजनिक क्षेत्र की एमएमटीसी ने 5,000 टन तुअर दाल का आयात किया। 2014-15 में दाल का उत्पादन 1.72 करोड़ टन रहा जबकि जरूरत 2.5 करोड़ टन है।