मुंबई की 12 साल की मरियम ने सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश की है। वह गीता के ज्ञान की टॉपर बन गई हैं। मरियम धर्म से मुसलमान है।
मरियम ने मुंबई में आयोजित हुई इस्कॉन की गीता के ज्ञान की प्रतियोगिता में पहला स्थान प्राप्त किया। 195 स्कूलों के साढ़े चार हज़ार बच्चों ने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। लेकिन हैरानी की बात है कि सिर्फ मरियम ही इकलौती थीं जिसे 100 में से 100 नंबर मिले
मरियम मुसलमान है लेकिन खास बात है कि वह गीता के ज्ञान के मामले में टॉपर बन गई हैं. वह हर रोज़ गीता पढ़ती है।
मरियम मुंबई के मीरा रोड के एक स्कूल में छठी क्लास में पढ़ती है। मरयम का कहना है कि उसके माता पिता ने उसे गीता पढ़ने के लिए प्ररित किया और सिर्फ पढ़ने के लिए ही नहीं गीता में कही गई बातों पर भी अमल करने को भी।
मरियम का कहना है कि उनके माता पिता ने उसे बताया कि सारे धर्म एक हैं। मानवता भी एक धर्म होता है जिसे हमने बांट दिया। मैं सबसे कहती हूं कि हम लोग सब एक हैं हम लोग धर्म के नाम पर झगड़ा कभी नहीं करते हैं।
मरयम को आज गीता के ज्ञान के लिए अवार्ड मिला तो पिता आसिफ सिद्दीकी बेहद खुश हैं, उनका कहना है कि मरियम ने सही समय पर सही काम किया।बच्चों की ये उम्र कच्चे घड़े के समान होती है, जो आकार देंगे वैसा बन जाएंगे..हर धर्म में बेहतर से बेहतर चीजें सिखायी गई हैं लेकिन ज़रूरत है उन्हें बताने की।
मरयम की मां फरहाना सिद्दीकी भी आज बेहद खुश हैं। उनके मुताबिक उन्होंने मरयम को बचपन से ही ये बाते बताई गई थी कि धर्म अलग नहीं होते नाम अलग हैं लेकिन सबका संदेश एक ही है।
मरयम गीता के ज्ञान चैंपियन बन चुकी है और अब भी मरयम गीता पढ़ती है साथ ही अपने दोस्तों को भी गीता का ज्ञान देती है