
मुंबई के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉलिटिकल साइंस के टीवी शेखर और आईआईटी हैदराबाद के वीपी शिजीथ ने इस नाम के साथ रह रही लड़कियों पर इसके मनोवैज्ञानिक असर पर एक रिसर्च किया है। रिसर्च में सतारा में 77 परिवारों में नकुशा नाम वाली 44 लड़कियों से बात की गई।
रिसर्च में पाया गया कि इन लड़कियों की अम्र 4 से लेकर 48 तक है। इससे ज़ाहिर है कि ये कुप्रथा दशकों से चल रही है। रिसर्च के मिताबिक़ 70 फ़ीसद लड़िकयों को अपने नाम की वजह से अपमानित होना पड़ता है। बचपन में तो इन्हें एहसास नहीं होता लेकिन स्कूल तक आने पर उन्हें इसका मतलब मसझ में आने लगता है।
अपने नाम से दु:खी लड़कियों का स्कूल में दूसरे बच्चे उड़ाते हैं मज़ाक
इनमें से लगभग सभी लड़कियां अपने नाम को लेकर नाख़ुश थी। उनका कहना था कि समाज में उन्हें अजीब नज़रों से देखा जाता है और स्कूल में साथी बच्चे भी उनका मज़ाक उड़ाते हैं।
नाम को लेकर कुछ ने बगावत कर रखा नया नाम
कुछ परिवारों ने लड़कियों के बग़ावत करने के बाद उनका फिर से नामकरण भी किया है लेकिन ये परंपरा आज भी सतारा में जारी है।
2011 में सतारा की ज़िला परिषद ने नकुशा नाम की 280 लड़कियों का पता कर उनका दोबारा नामकरण करवाया। लेकिन अफ़सोस की बात ये है कि उनका पुराना नाम आज भी उनका पीछा कर रहा है।