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महिलाएं 16 तो नागा बाबा करते हैं 17 श्रृंगार !

 Written By: India TV News Desk
 Published : Aug 04, 2015 01:44 pm IST,  Updated : Aug 04, 2015 02:18 pm IST

नई दिल्ली: जब भी श्रृंगार की बात की जाती है तो सभी का ध्यान बरबस ही महिलाओं की ओर खींच जाता है। पर क्या आप जानते हैं कि नागा साधु महिलाओं से भी कहीं अधिक

बातचीत के दौरान नागा संत ने कहा कि शाही स्नान से पहले नागा साधु पूरी तरह सज-धज कर तैयार होते हैं और फिर अपने ईष्ट की प्रार्थना करते हैं।

नागाओं के सत्रह श्रृंगार के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि लंगोट, भभूत, चंदन, पैरों में लोहे या फिर चांदी का कड़ा, अंगूठी, पंचकेश, कमर में फूलों की माला, माथे पर रोली का लेप, कुंडल, हाथों में चिमटा, डमरू या कमंडल, गुथी हुई जटाएं और तिलक, काजल, हाथों में कड़ा, बदन में विभूति का लेप और बाहों पर रूद्राक्ष की माला 17 श्रृंगार में शामिल होते हैं।

नागा संत बताते हैं कि लोग नित्य क्रिया करने के बाद खुद को शुद्घ करने के लिए गंगा स्नान करते हैं, लेकिन नागा संन्यासी शुद्घीकरण के बाद ही शाही स्नान के लिए निकलते हैं।

महाकुम्भ पहुंचे नागा सन्यासियों की एक खासियत यह भी है कि इनका मन बच्चों के समान निर्मल होता है। ये अपने अखाड़ों में हमेशा धमा-चौकड़ी मचाते रहते हैं। इनका मठ इनकी अठखेलियों से गूंजता रहता है।

अखाड़ों की बात करें तो महानिर्वाणी, जूना और निरंजनी अखाड़ों में सबसे अधिक नागा साधुओं की तादाद है।

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