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फर्जी नारकोटिक्स केस में कतर की जेल में बंद थे ओनिबा और शरीक, बेटी के लौट रहे हैं भारत

 Reported By: Abhay Parashar
 Published : Apr 13, 2021 11:21 pm IST,  Updated : Apr 14, 2021 08:57 am IST

नारकोटिक्स के फर्जी केस में कतर की जेल में बंद पति-पत्नी ओनिबा और शरीक अपनी बच्ची के साथ बुधवार को भारत लौट रहे हैं। उनकी बच्ची का जन्म कतर की जेल में हुआ था।

फर्जी नारकोटिक्स केस में कतर की जेल में बंद थे ओनिबा और शरीक, बेटी के लौट रहे हैं भारत- India TV Hindi
फर्जी नारकोटिक्स केस में कतर की जेल में बंद थे ओनिबा और शरीक, बेटी के लौट रहे हैं भारत

मुंबई: नारकोटिक्स के फर्जी केस में कतर की जेल में बंद पति-पत्नी ओनिबा और शरीक अपनी बच्ची के साथ बुधवार को भारत लौट रहे हैं। उनकी बच्ची का जन्म कतर की जेल में हुआ था। यह कतर की सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बाद अब कतर से मुंबई लौट रहे हैं। वह कतर एयरवेज की फ्लाइट नम्बर QR556 से रात 2:35 बजे मुंबई पहुंचेगे। 

इनके लौटने में एनसीबी डायरेक्टर राकेश अस्थाना और एनसीपी ऑप्स डिप्टी डायरेक्टर केपीएस मल्होत्रा की कड़ी मेहनत है। इंडिया टीवी भी शुरू से ही ओनिबा और शरीक के साथ खड़ा रहा है। हम साल 2020 में भी ऑनिबा और शरीक की कहानी अपने पाठकों तक पहुंचा चुके हैं। अब यह दोनों अपनी बेटी के साथ भारत लौट रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

जुलाई 2019 में मुंबई के एक दंपति को जाल में फंसाकर हनीमून पैकेज के नाम पर कतर भेज दिया गया था। उन्हें एक बैग दिया गया था, जिसमें ड्रग्स थी। लेकिन, उन्हें ड्रग्स के बारे में नहीं पता था। जब दंपति कतर एयरपोर्ट पहुंचा तो उन्हें ड्रग्स के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। कतर की अदालत ने उन्हें 10 साल की सजा सुनाई और फाइन भी लगाया था।

यहां भारत में दंपति के परिवार ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का दरवाजा खटखटाया। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के डायरेक्टर राकेश अस्थाना और एनसीपी ऑप्स डिप्टी डायरेक्टर केपीएस मल्होत्रा के नेतृत्व में मामला दर्ज कर मामले की जांच की तो यह साफ हो गया कि दोनों निर्दोष हैं और गलत तरीके से उन्हें इस मामले में फंसाया गया है। 

नारकोटिक्स ने यहां जांच करते हुए इस मामले में एक बड़े ड्रग्स सिंडिकेट का भी पर्दाफाश किया। MEA ने इसमें संज्ञान लेते हुए कतर की सरकार से बातचीत की और मामला कतर की कोर्ट में गया। कतर की कोर्ट ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की जांच को सही माना और 29 मार्च 2021 को दोनों को बाइज्जत बरी कर दिया।

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