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OBC विधेयक का पारित होना राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण पल: PM मोदी

 Written By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Aug 11, 2021 11:40 pm IST,  Updated : Aug 11, 2021 11:40 pm IST

अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) की पहचान के लिए राज्यों को अधिकार प्रदान करने वाले विधेयक के पारित होने की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि यह वंचित वर्गों के लिए गरिमा, अवसर और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में उनकी सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

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OBC विधेयक का पारित होना राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण पल: PM मोदी Image Source : PTI

नई दिल्ली: अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) की पहचान के लिए राज्यों को अधिकार प्रदान करने वाले विधेयक के पारित होने की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि यह वंचित वर्गों के लिए गरिमा, अवसर और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में उनकी सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को ओबीसी की अपनी सूची बनाने का अधिकार प्रदान करने वाले एक महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक को बुधवार को संसद की मंजूरी मिल गयी। 

राज्यसभा में बुधवार को ‘संविधान (127वां संशोधन) विधेयक, 2021’ को पारित कर दिया गया। लोकसभा ने मंगलवार को इस विधेयक को पारित कर दिया था। मोदी ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘संविधान (127वां संशोधन) विधेयक, 2021’ का दोनों सदनों में पारित होना हमारे राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण क्षण है। यह विधेयक सामाजिक सशक्तिकरण को आगे बढ़ाता है। यह हाशिए पर पड़े वर्गों को सम्मान, अवसर और न्याय सुनिश्चित करने के लिए हमारी सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।’’ 

विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है, ‘‘यह विधेयक यह स्पष्ट करने के लिये है कि यह राज्य सरकार और संघ राज्य क्षेत्र को सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े वर्गो की स्वयं की राज्य सूची/संघ राज्य क्षेत्र सूची तैयार करने और उसे बनाये रखने को सशक्त बनाता है।’’ इसमें कहा गया है कि देश की संघीय संरचना को बनाए रखने के दृष्टिकोण से संविधान के अनुच्छेद 342क का संशोधन करने और अनुच्छेद 338ख एवं अनुच्छेद 366 में संशोधन करने की आवश्यकता है। यह विधेयक उपरोक्त उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिये है। 

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने 5 मई के बहुमत आधारित फैसले की समीक्षा करने की केंद्र की याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें यह कहा गया था कि 102वां संविधान संशोधन नौकरियों एवं दाखिले में सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े (एसईबीसी) को आरक्षण देने के राज्य के अधिकार को ले लेता है। वर्ष 2018 के 102वें संविधान संशोधन अधिनियम में अनुच्छेद 338बी जोड़ा गया था, जो राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के ढांचे, कर्तव्यों और शक्तियों से संबंधित है जबकि 342 ए किसी विशिष्ट जाति को ओबीसी अधिसूचित करने और सूची में बदलाव करने के संसद के अधिकारों से संबंधित है। 

पांच मई को उच्चतम न्यायालय में न्यायमूर्ति अशोक भूषण के नेतृत्व वाली पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने सर्वसम्मति से महाराष्ट्र में मराठा कोटा प्रदान करने संबंधी कानून को निरस्त कर दिया था। विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि संविधान 102वां अधिनियम 2018 को पारित करते समय विधायी आशय यह था कि यह सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों की केंद्रीय सूची से संबंधित है। यह इस तथ्य को मान्यता देता है कि 1993 में सामाजिक एवं शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े वर्गो की स्वयं की केंद्रीय सूची की घोषणा से भी पूर्व कई राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की अन्य पिछड़े वर्गों की अपनी राज्य सूची/ संघ राज्य क्षेत्र सूची है।

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