पठानकोट: आतंकी हमले के कारण चार दिन तक बंधक बने रहे पठानकोट वायुसैन्य अड्डे को पूरी तरह खंगाल लेने के लिए तलाशी अभियान आज जारी है और अब सभी की नजरें आतंकी हमले की जांच पर केंद्रित हो गई हैं। एनआईए के प्रमुख घटनास्थल का जायजा लेने के लिए यहां पहुंच रहे हैं। सुरक्षा अधिकारियों ने आज कहा कि एयरबेस पर तलाशी अभियान एक या दो दिन और जारी रह सकते हैं। यहां हुए आतंकी हमले में सात सुरक्षाकर्मी और छह आतंकी मारे गए थे। रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने कल कहा था कि इस समय किसी आतंकी के अंदर होने का संदेह नहीं है। फिर भी जब तक तलाशी अभियान पूरे नहीं हो जाते, तब तक मैं कोई नकारात्मक रिपोर्ट नहीं दूंगा। तलाशी अभियान कल तक पूरे हो सकते हैं।
पर्रिकर ने कहा था कि तलाशी अभियान सुरक्षा से जुड़े उद्देश्यों के लिए चलाए जा रहे हैं क्योंकि वहां युद्धक सामग्री के अलावा जिंदा, अविस्फोटित बम हैं। उन्होंने कहा था, संभवत: वे उच्च गुणवत्ता वाले विस्फोटक लेकर आए थे। उन्होंने कहा था कि आतंकियों के पास एके47, परिष्कृत अंडर ग्रेनेड बैरल लॉन्चर, पिस्तौलें, स्विस और कमांडो चाकू, 40-50 किलो गोलियां और तीन-चार दर्जन मैगजीन एवं मोर्टार थे। पर्रिकर ने यह भी घोषणा की थी कि हमले के दौरान मारे गए सभी सात सुरक्षाकर्मियों को शहीद का दर्जा दिया जाएगा और इसके चलते उन्हें युद्ध जैसी स्थिति में हताहत होने वालों को मिलने वाले सभी लाभ दिए जाएंगे। इस घटनाक्रम में अब ध्यान जांच पर केंद्रित हो गया है और आतंकवाद रोधी जांच एजेंसी एनआईए के प्रमुख शरद कुमार दोपहर के समय घटनास्थल का जायजा लेने के लिए यहां पहुंचेंगे।
कुमार ने कल कहा कि हमले के पीछे की साजिश की गुत्थी को सुलझाना एक बड़ी चुनौती है लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह से पूर्व में एजेंसी कई पेचीदा मामलों में दोषियों की पहचान करने में कामयाब रही है। कुमार ने कहा था, यह बहुत चुनौतीपूर्ण मामला है और बहुत सी जांच की जाने की जरूरत है। इसलिए, मैं इस मामले के लिए कोई समय सीमा नहीं तय कर रहा हूं लेकिन हम जांच को जल्दी पूरी करने की कोशिश करेंगे। जब कुमार से पठानकोट हमले में संलिप्त आतंकियों की राष्ट्रीयता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा था कि इस बात का बहुत कम संदेह है कि आरोपी पाकिस्तान से थे। उन्होंने साथ ही यह भी कहा, हमारे समक्ष जो भी साक्ष्य अभी उपलब्ध हैं, वे आतंकियों और सीमापार बैठे उनके आकाओं और परिजन के बीच हुई टेलीफोन कॉल के सुने जाने पर आधारित हैं।
बहरहाल, उन्होंने इस हमले के लिए किसी भी संगठन को जिम्मेदार ठहराने से गुरेज किया और कहा, हमें पहले काम करने दीजिए। जब हमें अपने दावों के पक्ष में कुछ साक्ष्य मिल जाएंगे तब हम सबकुछ स्थापित कर सकेंगे। यह मामला अदालत के समक्ष साबित किया जाना है इसलिए मैं कयासों के आधार पर बयान देने से बचूंगा। ऐसा माना जाता है कि आतंकियों का संबंध पाकिस्तान आधारित जैश-ए-मुहम्मद के साथ था। कुमार ने जांच को अभी शुरूआती चरण में बताते हुए इस बात की पुष्टि करने से इंकार कर दिया था कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की इस घटना में कोई भूमिका थी। उन्होंने कहा, मैं नहीं कह सकता कि आईएसआई संलिप्त थी या नहीं। हमारी जांच पूरी होने के बाद देखते कि क्या होता है।
एनआईए ने पठानकोट में हुए आतंकी हमले के संदर्भ में कल तीन मामले दर्ज किए थे। इनमें संदिग्ध आतंकियों द्वारा टैक्सी चालक की हत्या का, पुलिस के एसी रैंक के अधिकारी के अपहरण का और एक और दो जनवरी की दरम्यानी रात में भारतीय वायुसेना के बेस पर हमला बोलने का मामला शामिल है। एनआईए प्रमुख ने कहा कि सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री का दल पहले से ही एजेंसी के 20 सदस्यीय दल की मदद कर रहा है। पठानकोट मंे आतंकी हमला होने की खबर दो जनवरी की सुबह मिलने के बाद से ही एजेंसी का दल पठानकोट में मौजूद है।