नई दिल्ली: महादेव की नगरी काशी से दिल्ली आने जाने वाले यात्रियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महामना एक्सप्रेस ट्रेन की अनोखी सौगात देने जा रहे हैं। पीएम मोदी खुद 22 जनवरी को बटन दबाकर इस ट्रेन को रवाना करेंगे। रेलवे की ड्रीम ट्रेन मानी जा रही महामना एक्सप्रेस में बेहतरीन फैसिलिटी का लुत्फ उठा पाएंगे। यह ट्रेन हफ्ते में सिर्फ तीन दिन मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को ही अपनी सेवाएं देगी। आपको बता दें की यात्रियों के सफर को आरामदायक बनाने के लिए तमाम नई सुविधाओं के साथ-साथ इस ट्रेन के डिब्बों को स्टाइलिश तरीके से सजाया गया है जो इसकी खूबसूरती को बढ़ाते हैं। गौरतलब है कि रेलवे के ये कोच देश में ही मेक इन इंडिया कॉन्सेप्ट के तहत तैयार किए गए हैं। हालांकि अब तक इस ट्रेन का भाड़ा तय नहीं हुआ है। लेकिन माना जा रहा है कि इस ट्रेन का भाड़ा दूसरी ट्रेनों के मुकाबले थोड़ा ज्यादा होगा।
कब चलेगी ट्रेन और कितने बजे होगी रवाना:
महामना एक्सप्रेस वाराणसी से हर मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को चलेगी। वाराणसी से ट्रेन शाम 6 बजकर 35 मिनट पर रवाना होगी और अगली सुबह 8 बजकर 25 मिनट पर नई दिल्ली पहुंचेगी। यह एक मॉर्डन तकनीक से लैस ट्रेन है। इस ट्रेन में हर वो सुविधा है जो आप एक रेल में होने की उम्मीद करते हैं।
क्या हैं खास सुविधाएं:
- बैंगनी रंग की इस ट्रेन के बाहर स्टाइलिश डिजायन बनाए गए हैं जो इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा रहे हैं। खास बात यह है कि इस बार सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा गया है। इन डिब्बों को बनाने के लिए फायरप्रूफ मैटिरियल का इस्तेमाल किया गया है, जिससे अनहोनी की सूरत में आग लगने की संभावना कम से कम रहेगी।
- ट्रेन के सीढ़ियों पर सेंसर से लैस एलईडी लाइट लगाई गई है ताकि रात में पैसेंजर को चढ़ने-उतरने में दिक्कत न हो।
- ट्रेन के बाहर लगे डिस्प्ले बोर्ड को भी आधुनिक बनाया गया है। मैनुअल बोर्ड को हटाकर इलेक्ट्रानिक डिस्प्ले लगाया गया है, जिसमें ट्रेन के नाम, नंबर और कोच संख्या समेत स्टेशन की जानकारी दी जाएगी।
- कोच के अंदर पेंटिंग और गुलदस्ते लगाए गए हैं। बॉयो टॉयलट के साथ आरामदायक सीटें लगाई गई हैं।
- प्लेन के तर्ज पर एसी फर्स्ट क्लास के केबिन में 12 इंच की एलईडी टीवी की व्यवस्था की गई है।
- ऊपर की बर्थ पर चढ़ने के लिए सीढ़ियां बनाई गई है।
- केबिन में वॉश बेसिन और डस्टबिन की सुविदा दी गई है।
- इलेक्ट्रॉनिक विंडो दिया गया है, स्विच दबाते ही यह विंडो ओपन हो जाएगा।
- केबिन में पहली बार टॉयलेट सेंसर दिया गया है, जिसके सिग्नल से पता चल जाएगा कि टॉयलेट खाली है या नहीं।
- टॉयलेट में नहाने के लिए शॉवर दिया गया है।
- बायो टॉयलेट के साथ पहली बार विंडो हटाकर एक्जॉस्ट दिया गया है।
कहां बने रेल के डिब्बे और कितना आया खर्चा:
इस रेल के डिब्बों को भोपाल की वर्कशॉप में बनाया गया है। हर एसी वाले कोच पर लगभग 25 लाख रुपए और बिना एसी के कोच पर 18 लाख रुपए का खर्च आया है। फिलहाल कुल 111 कोच पर काम चल रहा है जिनमे से साल 2016-17 में 87 डिब्बे काम करना शुरु कर देंगे। रेलवे के इन नए कोचेज को देखकर ये कहा जा सकता है कि नए जमाने के साथ रेलवे ने अपने आप में बड़ी तब्दीलियां लाई है और यात्रियों के सुविधाओं को ख्याल में रखकर इन डिब्बों का निर्माण किया गया है।
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