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‘परीक्षा पे चर्चा’ में PM मोदी ने कहा, खाली समय न हो तो जिंदगी एक रोबोट जैसी हो जाती है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि छात्रों की दिनचर्या में मिलने वाला खाली समय न सिर्फ खजाना है बल्कि एक अवसर भी है।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Published on: April 07, 2021 22:04 IST
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Image Source : TWITTER प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि छात्रों की दिनचर्या में मिलने वाला खाली समय न सिर्फ खजाना है बल्कि एक अवसर भी है।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि छात्रों की दिनचर्या में मिलने वाला खाली समय न सिर्फ खजाना है बल्कि एक अवसर भी है। पीएम ने कहा कि दिनचर्या में खाली समय ना हो तो जिंदगी एक रोबोट जैसी हो जाती है। ‘परीक्षा पे चर्चा’ के ताजा संस्करण में डिजीटल माध्यम से छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से संवाद करते हुए प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि कोविड-19 के कारण बच्चों और युवाओं को बहुत नुकसान उठाना पड़ा किंतु इस महामारी ने संयुक्त परिवार की ताकत और बच्चों के जीवन निर्माण में उसकी भूमिका का भी बखूबी एहसास कराया।

पीएम ने कहा, ‘खाली समय एक अवसर है’

प्रधानमंत्री से जब एक छात्र ने पूछा कि खाली समय में बच्चों को क्या करना चाहिए तो उन्होंने जवाब दिया कि खाली समय एक सौभाग्य है और एक अवसर भी है। उन्होंने कहा, ‘इसको खाली मत समझना, यह खजाना है। खाली समय एक अवसर है। आपकी दिनचर्या में खाली समय के पल होने ही चाहिए वरना तो जिंदगी एक रोबोट जैसी हो जाती है। आपकी जिंदगी ऐसी होनी चाहिए कि जब आपको खाली समय मिले, वह आपको असीम आनंद दे।’

‘कोरोना काल में हमने बहुत कुछ खोया है’
उन्होंने बच्चों को सुझाव दिया कि वे अपनी भावनाओं और विचारों को जाहिर करने के रचनात्मक तरीके ढूंढे क्योंकि ज्ञान का दायरा कई बार सीमित होता है लेकिन रचनात्मकता बच्चों को ज्ञान से भी बहुत दूर लेकर जाती है। कोरोना महामारी के चलते छात्रों के जीवन को पहुंचे नुकसान संबंधी एक सवाल का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे बच्चों और युवाओं का जो नुकसान हुआ है, वह बहुत बड़ा है। उन्होंने कहा, ‘कोरोना काल में यदि हमने बहुत कुछ खोया है तो बहुत कुछ पाया भी है। इससे मिली सीख को हमें जीवन पर्यंत याद रखना चाहिए।’ 

‘कोरोना काल ने संयुक्त परिवार की ताकत दिखाई’
उन्होंने कहा कि कोरोना की सबसे पहली सीख तो यही है कि बच्चों ने इस दौरान जिन लोगों की कमी महसूस की उन लोगों की अपने जीवन में भूमिका के महत्व का एहसास हुआ। उन्होंने कहा, ‘कोरोना काल में एक और बात यह भी हुई कि हमने परिवार में एक दूसरे को ज्यादा नजदीकी से समझा है। कोरोना ने सोशल डिस्टेंसिंग के लिए मजबूर किया लेकिन परिवारों में भावनात्मक लगाव को भी इसने मजबूत किया। कोरोना काल ने यह भी दिखाया है कि एक संयुक्त परिवार की ताकत क्या होती है और घर के बच्चों के जीवन निर्माण में उनकी कितनी भूमिका होती है।’

‘कठिन प्रश्नों को पहले हल करना चाहिए’
प्रधानमंत्री ने समाजशास्त्र से जुड़े शोधकर्ताओं और विश्वविद्यालयों से अनुरोध किया कि उन्हें कोरोना से समाज जीवन में आए बदलावों और इस संकट का मुकाबला करने में संयुक्त परिवारों की भूमिका के बारे में अध्ययन या शोध करना चाहिए। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर माता-पिता बच्चों को परीक्षा के समय सरल प्रश्नों को पहले और कठिन प्रश्नों को बाद में हल करने को कहते हैं लेकिन इस मामले में उनकी राय जुदा है। उन्होंने कहा, ‘मैं इसे अलग नजरिए से देखता हूं। कठिन प्रश्न को पहले हल कीजिए। आप जब तरोताजा होते हैं तो कठिन सवाल भी आसान हो जाते हैं।’

‘मुझे कठिन चीजों से शुरुआत करना पसंद है’
प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों से अपना एक अनुभव साझाा करते हुए बताया कि वह कठिन चीजों से शुरुआत करना करना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में उनके समक्ष कई मुश्किल चीजें आती हैं। उन्होंने बताया, ‘मैं सुबह का काम कठिन चीजों से आरंभ करना पसंद करता हूं। मुश्किल से मुश्किल चीजें मेरे अफसर मेरे सामने लेकर आते हैं। उनको मालूम है कि उस समय मेरा एक अलग मूड होता है। मैं चीजों को बिल्कुल तेजी से समझ लेता हूं और निर्णय करने की दिशा में आगे बढ़ता हूं।’ (भाषा)

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