नई दिल्ली: आइंस्टीन ने सौ साल पहले अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण तरंगों की भविष्यवाणी की थी। आज सौ साल बाद उनकी यह भविष्यवाणी सही साबित हो गई है। हाल ही में वैज्ञानिकों ने गुरुत्वाकर्षण तरंगों को खोजकर बुधवार को इसकी पुष्टि की है। वैज्ञानिकों ने इसे सदी की सबसे बड़ी खोज मानी है, साथ ही उनका कहना है कि इस खोज से अंतरिक्ष को समझने में आसानी होगी। इस खोज से वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष को देखने का एक नया नजरिया मिला है उनके लिए यह एक मूक फिल्म को आवाज देने जैसा है क्योंकि ये तरंगे ब्रह्मांड की आवाज हैं। खोज टीम में शामिल कोलंबिया यूनिवर्सिटी के एस्ट्रोफिजिसिस्ट स्जाबोल्क्स मार्का ने कहा, ‘अभी तक हमारी सिर्फ नजरें आसमान पर थीं और हम उसका संगीत नहीं सुन सकते थे। अब आकाश पहले जैसा नहीं होगा।’
शोधकर्ताओं ने घोषणा कहा कि 1.3 अरब वर्ष पहले जब दो ब्लैक होल टकराए थे तो इन दोनों के जुड़ने से एक तरंग अंतरिक्ष के रास्ते 14 सितंबर 2015 को पृथ्वी पर पहुंची। जटिल यंत्रों के जरिए इसकी खोज की गई। इस घटना की पहचान अमेरिका स्थित दो भूमिगत डिटेक्टरों ने की। इन डिटेक्टरों को कुछ इस तरह डिजाइन किया गया है कि इससे गुरुत्व तरंगों से गुजरने वाली अत्यंत छोटी कंपन का भी पता लगा सकते हैं।
इसे लिगो के नाम से जाना जाता है
इस परियोजना को लेसर इंटरफेरोमीटर ग्रैविटेशनल ग्रैविटेशनल-वेव ऑब्जर्वेटरी या लिगो के नाम से जाना जाता है जिसकी लागत 1.1 अरब डॉलर है। इस परियोजना की फंडिंग करने वाले अमेरिकी नेशनल साइंस फाउंडेशन के निदेशक फ्रांस कोरडोवा ने कहा, ‘लिगो ने एस्ट्रोफिजिक्स के क्षेत्र में पूरी तरह एक नये क्षेत्र की शुरुआत की है।’
1999 में शुरू हुआ था निर्माण
इनका निर्माण 1999 में शुरू हुआ था और 2001 से 2007 तक निरीक्षण किए गए। इसके बाद वैज्ञानिकों ने लिगो में बड़ा बदलाव करते हुए इसे पहले से 10 गुना अधिक शक्तिशाली बनाया। इस एडवांस मशीन ने पहली बार पिछले साल सितंबर में पूरी तरह काम किया। अपनी खोज की कड़ी में लुसियाना स्थित डिटेक्टर ने 14 सितंबर को गुरुत्व तरंगों के पहले संकेत पकड़े।