
वी.के. पाण्डेय ने बताया कि, "मैं यही सोचता था कि 'नेस्ले' कंपनी के प्रोडक्ट्स फूड सेफटी के कड़े मापदंडों का पालन कर के बनते हैं.. ऐसे में मैगी में लेड और MSG कैसे हो सकता है। ये सुनिश्चित करने के लिए कि कहीं लैब की रिपोर्ट में गलती तो नहीं हुए है, इसलिए मैंने मैगी नूडल के कुछ और नमूने बाज़ार से लिए और दोबारा जांच के लिए भेजे..."
उन्होंने बताया कि, मैगी के पैकिंग इस तरह की जाती है कि हैवी मेटल्स का पाता नहीं चलता, जो कि रोज़मर्रा के खानें में ख़तरनाक है।
बाज़ार में 'नेस्ले' ब्रांड के नाम को ध्यान में रखते हुए पाण्डेय ने सूपर मार्केट 'ईज़ीडे' से भी मैगी के कुछ नमूने सेंट्रल फूड लैबोरेट्री, कोलकाता भेजे। पर वहां भी नतीजों को कोई फर्क नहीं पाया गया।
दोनों लैब की जांच रिपोर्ट सामने आई और बाराबंकी के छोटे से कस्बे से शुरू हुआ बवाल देशभर फैल गया। भारत के नूडल्स मार्केट पर राज करने वाली मैगी में लेड की मात्रा सामान्य से ज्यादा होने के आरोप लगे और इसी विवाद के चलते बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को दीवाना बना देने वाली मैगी आज सवालों के घेरे में है ।