बग़ैर किसी अपराध बोध के महिलाओं के साथ छेड़ख़ानी करने, उन्हें तंग करने और उनके साथ बलात्कार करने वाले तथाकथित मर्दों के लिए महिला महज़ मनोरंजन का एक साधन मात्र होती है लेकिन बलात्कार की शिकार किसी लड़की या महिला के लिए ये एक ऐसा घाव होता है जो सारी उम्र रिसता रहता है।
इस वीडियो में ट्रांसजेंडर की भूमिका में अभिनेता वरुण प्रुथी ऐसे ही एक व्यक्ति को एहसास कराता है कि बलात्कार की शिकार पर क्या ग़ुज़रती है।
दरअसल जब ख़ुद के पैर में कांटा लगता है तभी दर्द का एहसास होता है।
हालंकि क़ानून को हाथ में लेना इस समस्या का समाधन नहीं है लेकिन जब सरकार समाज को इन बुराईयों से निजात दिलाने में नाकाम हो जाए तो एक आम आदमी को मजबूरन ऐसा क़दम उठाना पड़ता है।
समाज में व्याप्त इन बुराईयों का विरोध करना हर नागरिक की ज़िम्मेदारी बनती है लेकिन हमेशा मज़ाक और बेइज़्ज़ती बर्दाश्त करने वाले ट्रांस्जेंडरों ने हाल ही में क़ाबिल-ए-तारीफ़ काम किया है।
पिछले साल 27 अक्तूबर को पूर्वी दिल्ली के एक इलाक़े में जब साम्प्रदायिक दंगा भड़का था तब इन ट्रांसजेंडरों ने ही हथियारों से लैस दंगाईयों के बीच जाकर अमन का संदेश दिया था।