नई दिल्ली: वरिष्ठ भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने नरेंद्र मोदी सरकार के हालात की तुलना इंदिरा गांधी के आपातकाल के दौर से करने वाले अपने बयान पर अब स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि उनके बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है। सिन्हा ने कहा कि हम सभी को पता है कि भारत के लोगों ने आपातकाल पर कैसी प्रतिक्रिया दी थी जो असहमति के स्वर को बनाए रखने के लिए हमारे देश में सबसे ताकतवर लोकतांत्रिक प्रयास था।
सिन्हा ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा, “ जब कुछ लोग असहिष्णुता के मामलों की बातें करते हैं तो मैं उन्हें इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल लगाए जाने की याद दिलाता हूं, मैं कहता हूं कि इस देश ने साल 1977 में उन्हें सबक सिखाया था, क्योंकि असहिष्णुता हमारे अंदर नहीं है। संवाद को दबाना हमारी विचारधारा में नहीं है। इसलिए लोकतंत्र और संवाद की परंपरा जीवित है।” सिन्हा ने कहा कि उन्होंने बस इतनी सी बात कही थी।
वरिष्ठ भाजपा नेता ने इस बात पर भी अफसोस जताया कि विपक्ष संसद को सुचारू रूप से चलने नहीं दे रहा। किसी का नाम लिए बगैर उन्होंने कांग्रेस के एक नेता पर निशाना साधा जिन्होंने संसदीय समिति की बैठकों में जीएसटी विधेयक पर कभी कोई चिंता जाहिर नहीं की, लेकिन बाद में ऐतराज जताने लगे। सिन्हा ने कहा कि वाजपेयी सरकार में विपक्ष के साथ संवाद की मदद से कई अहम विधेयक पारित कराए गए थे।