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लद्दाख की खत्म हो रही झील को बचाने के लिए की गई अनोखी पहल, बेकार बह रहे पानी का होगा इस्तेमाल

 Written By: Rituraj Tripathi
 Published : Sep 14, 2026 12:09 pm IST,  Updated : Sep 14, 2026 12:12 pm IST

लद्दाख की मरती हुई भव्य झील को बचाने की कोशिश की जा रही है। इसे फिर से जिंदा करने के लिए बेकार बह रहे पानी का इस्तेमाल किया जाएगा।

Ladakh - India TV Hindi
लद्दाख की खत्म हो रही झील को बचाने की मुहिम Image Source : LOK NIWAS LADAKH

लद्दाख: लद्दाख की मरती हुई भव्य झील को बचाने के लिए एक अनोखी इकोलॉजिकल पहल की जा रही है। इस झील के पुनरुद्धार के लिए उपराज्यपाल वीके सक्सेना अब एक और बड़े अभियान पर निकल पड़े हैं। दरअसल लेह के पास सूखी जमीन की सिंचाई के लिए स्टॉक ग्लेशियर के 90 मिलियन लीटर पानी को इगू-फे और चुचोट गांव की नहरों में सफलतापूर्वक पहुंचाने के बाद, उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने अब एक और बड़ा प्रोजेक्ट शुरू किया है। 

इसके तहत चांगथांग जिले की रूपशो खर्नक ग्लेशियर धारा के पानी को लगभग 15,000 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित त्सो कार झील तक पहुंचाया जाएगा, ताकि इस खत्म हो रही झील को फिर से जीवित और बेहतर बनाया जा सके।

इस प्रोजेक्ट में रूपशो खर्नक धारा से त्सो कार झील तक हर दिन औसतन 132 क्यूसेक या 320 मिलियन लीटर बेकार बह रहे ग्लेशियर के पानी को पहुंचाने की योजना है। पिछले एक दशक में इस झील का आकार लगभग 70% तक कम हो गया है। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि अभी ग्लेशियर का यह सारा बेकार पानी सिंधु नदी में बहकर बर्बाद हो जाता है। 

त्सो कार झील के बारे में जानिए

त्सो कार लद्दाख की सबसे मशहूर ग्लेशियर झीलों में से एक है। यह झील पहले लगभग 11,000 एकड़ में फैली हुई थी। हालांकि अब हालात ये हैं कि ये सिमटकर सिर्फ 3,200 एकड़ रह गई है। इसका नतीजा ये हुआ है कि यह झील, जो कभी प्रवासी पक्षियों और मशहूर ब्लैक-नेक्ड क्रेन का फलता-फूलता ठिकाना हुआ करती थी, तेजी से खत्म हो रही है और अब यहां बहुत कम संख्या में पक्षी आते हैं।

ऐसे में बेकार बह रहे ग्लेशियर के पानी को इस झील में पहुंचाया जाएगा, जिससे ये उम्मीद जगी है कि  त्सो कार झील एक साल के अंदर अपनी पुरानी शान वापस पा लेगी।

पहल की हर तरफ हो रही तारीफ

भारत में इतनी ज्यादा ऊंचाई और इतने मुश्किल हालात वाली जगह पर किसी मरती हुई झील को बचाने की यह अपनी तरह की पहली और इकलौती कोशिश है; यहां गर्मियों में भी तापमान ज़्यादातर 10 डिग्री से कम रहता है और सर्दियों में यह माइनस 20 से 30 डिग्री तक गिर जाता है।

पानी के मैनेजमेंट की इस अनोखी पहल का विचार LG सक्सेना को 10 अगस्त को त्सो कार झील की अपनी पहली यात्रा के दौरान आया था, जब स्थानीय ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि यह शानदार झील तेजी से सिकुड़ रही है और पक्षियों की संख्या में भी भारी कमी आई है।

इस बड़े प्रोजेक्ट का मकसद त्सो कार झील को रिचार्ज करना है। इसके लिए झील से लगभग 11 किलोमीटर दूर और 18,000 फीट की ऊंचाई पर मौजूद रूपशो खर्नक धारा से ग्लेशियर के पिघले हुए पानी को, जिसका अभी तक इस्तेमाल नहीं हुआ है, चैनल के ज़रिए लाया जाएगा। गर्मियों के दौरान रूपशो खर्नक धारा से पानी के बहाव का पीक लेवल लगभग 132 क्यूसेक या 320 मिलियन लीटर प्रति दिन होने का अनुमान है।

इस योजना में ग्लेशियर से झील की ओर धारा के बहाव के रास्ते में मौजूद तीन प्राकृतिक गड्ढों (डिप्रेशन) का इस्तेमाल किया जाएगा। रूपशो खर्नक धारा से ग्लेशियर का पानी पहले गड्ढे में भेजा जाएगा, जो 270 एकड़ में फैला है। पहले गड्ढे से पानी को दूसरे गड्ढे में भेजा जाएगा, जो 24 एकड़ में फैला है, और उसके बाद पानी को तीसरे गड्ढे में भेजा जाएगा, जो 10 एकड़ में फैला है। पानी का लेवल बढ़ाने और आगे की ओर बहाव को कंट्रोल करने के लिए तीनों गड्ढों में से हर एक के आउटलेट पर तीन RCC पाइप वाला एक चेक डैम बनाया जाएगा।

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