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गुरु तेग बहादुर जी की शहादत के 350 साल पूरे, दिल्ली से अमृतसर तक साइकिल यात्रा लॉन्च

 Reported By: Ila Kazmi Edited By: Mangal Yadav
 Published : Oct 16, 2025 03:03 pm IST,  Updated : Oct 16, 2025 03:23 pm IST

गुरु तेग बहादुर जी की शहादत के 350 साल पूरे होने पर दिल्ली से अमृतसर तक साइकिल यात्रा लॉन्च किया गया। यह यात्रा 15 नवंबर को दिल्ली के शीशगंज गुरुद्वारे से निकलेगी और अमृतसर तक जाएगी।

दिल्ली से अमृतसर तक साइकिल यात्रा का शुभारंभ - India TV Hindi
दिल्ली से अमृतसर तक साइकिल यात्रा का शुभारंभ Image Source : REPORTER

नई दिल्लीः गुरु तेग बहादुर जी की शहादत के 350 साल पूरे होने पर दिल्ली से अमृतसर तक साइकिल यात्रा को लॉन्च किया गया है। यह यात्रा 15 नवंबर को दिल्ली के गुरुद्वारा शीश गंज साहिब से शुरू होकर अमृतसर में स्थित गुरु तेग़ बहादुर के जन्मस्थल तक जाएगी। 

इन रास्तों से होकर जाएगी यात्रा

इस यात्रा में सैकड़ों सिख नौजवान, श्रद्धालु और समाजसेवी भाग ले रहे हैं। यात्रा का उद्देश्य गुरु तेग बहादुर जी के त्याग, बलिदान और धर्म की रक्षा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है। ये यात्रा दिल्ली के चांदनी चौक से लेकर अमृतसर जोकि शहीदी  स्थान तक जाएगी। यह यात्रा दिल्ली से पाणिपथ,अंबाला लुधियाना, जालंधर होते हुए अमृतसर जाएगी।

सीनियर वाईस प्रेसिडेंट साइकिल फेडरेशन ऑफ़ इंडिया मनजीत सिंह जीके ने बताया कि गुरु टेग बहादुर बादशाह की शहादत को 350 साल हो रहे हैं। उनकी शहादत अपने हकों के लिए हुई थी। उन्होंने अपनी शहादत दे दी लेकिन सिर नहीं झुकाया। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब में धर्म परिवर्तन और नशा सबसे बड़ी समस्या है।

दिल्ली से अमृतसर तक साइकिल यात्रा का शुभारंभ
Image Source : REPORTERदिल्ली से अमृतसर तक साइकिल यात्रा का शुभारंभ

24 नवंबर, 1675 को दिल्ली में शहीद हुए थे गुरु तेग बहादुर जी 

बता दें कि गुरु तेग बहादुर जी 24 नवंबर, 1675 को दिल्ली में शहीद हुए थे। इस्लाम धर्म अपनाने से इनकार करने और कश्मीरी पंडितों के जबरन धर्म परिवर्तन का विरोध करने पर सार्वजनिक रूप से उनका सिर कलम कर दिया गया था। उनकी शहादत को प्रतिवर्ष 24 नवंबर को शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। 

 गुरु तेग बहादुर जी कश्मीरी पंडितों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा और बादशाह औरंगजेब की जबरन इस्लाम धर्म अपनाने की नीति का विरोध करने के लिए शहीद हुए थे। दिल्ली के चांदनी चौक में उनका सिर कलम किया गया था। उनकी स्मृति में वहां एक गुरुद्वारा, गुरुद्वारा शीश गंज साहिब, बनाया गया था।

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