ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत सरकार द्वारा कई डेलीगेशनों के विदेश यात्रा पर भेजा गया था। इस बीच अलग-अलग देशों का दौरा करने के बाद प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भारत लौटने लगे हैं। इस बीच भाजपा सांसद बैजयंत पांडा के नेतृत्व में चार प्रमुख मु्स्लिम देशों का दौरा करने वाला बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को भारत लौटा। इस दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक बैठक में प्रतिनिधिमंडल के प्रयासों की सराहना की। इस बैठक में प्रतिनिधिमंडल ने अपने दौरे के बारे में जानकारी दी। यह प्रतिनिधिमंडल 7 अलग-अलग प्रतिनिधिमंडलों में से पहला है, जिसमें पूर्व राजनयिकों के अलावा ज्यादातार वर्तमान और कुछ पूर्व सांसद शामिल हैं। वहीं धीरे-धीरे अब अन्य प्रतिनिधिमंडलों के भी लौटने का इंतजार है।
क्या बोले बैजयंत पांडा?
इस प्रतिनिधिमंडल ने सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और अल्जीरिया का दौरा किया और भारत का पक्ष रखा। संवाददाताओं से बात करते हुए बैजयंत पांडा ने कहा कि एक सफल यात्रा थी क्योंकि सभी देशों ने आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले और भारत की दंडात्मक सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी साझा की है।
बैजयंत पांडा के प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल?
- भाजपा सांसद बैजयंत पांडा
- भाजपा सांसद निशिकांत दुबे
- AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी
- गुलाम नबी आजाद
- फंगनन कोन्याक
- सतनाम संधू
- पूर्व राजनयिक हर्ष श्रृंगला
दूसरा प्रतिनिधिमंडल भी लौटा भारत
बैजयंत पांडा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले कुछ सालों में इन मु्स्लिम देशों के साथ मजबूत संबंध बनाए हैं। इनमें से कई ने उन्हें अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान भी दिया है। इसके अलावा रूस, स्लोवेनिया, ग्रीस, लातविया और स्पेन का दौरा करने के बाद डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि के नेतृत्व में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल देश लौट आया है।
कनिमोझी के प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल?
- डीएमके कनिमोझी करुणानिधि
- सपा सांसद राजीव राय
- भाजपा सांसद कैप्टन बृजेश चौटा (सेवानिवृत्त)
- आप सांसद अशोक कुमार मित्तल
- राजद सांसद प्रेम चंद गुप्ता
- राजदूत मंजीव एस पुरी
डेलीगेशन भेजने के पीछे का मकसद?
इसके बाद जब भारतीय सेना ने पलटवार करना शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान के कई एयरबेस तबाह हो गए, जिसके बाद पाकिस्तान घुटनों के बल आ गया। इसके बाद पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारत के डीजीएमओ से संपर्क करके सीजफायर का प्रस्ताव रखा। सीजफायर पर सहमति बन गई लेकिन भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि आगे सिर्फ पाकिस्तान से पीओके और आतंकवाद के मुद्दे पर ही बात होगी। दरअसल भारतीय डेलीगेशन को दुनियाभर में भेजने के पीछे का मकसद है पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर अलग-थलग करना।
दरअसल डेलीगेशन आतंकवाद के मुद्दे पर दुनियाभर में पाकिस्तान की पोल खोल रहा है ताकि पाकिस्तान को समर्थन ना मिले। साथ ही पाकिस्तान को वापस FATF की ग्रे लिस्ट में डाला जाए, ताकि पाकिस्तान को फंड्स ना मिले और मिले भी तो उसपर संयुक्त राष्ट्र की निगरानी हो, ताकि पाकिस्तान आतंकवाद का वित्तपोषण ना कर सके। साथ ही आतंकवाद के मामले पर पाकिस्तान पर लगाम लगाई जा सके।
(इनपुट- पीटीआई)