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मां ने 18 साल की बेटी की शादी चुपके से अपने तलाकशुदा भाई से तय कर दी, HC ने फैसले में कही बड़ी बात

 Edited By: Kajal Kumari @lallkajal
 Published : May 20, 2026 12:08 am IST,  Updated : May 20, 2026 12:08 am IST

एक मां ने अपनी 18 साल की बेटी की शादी चुपके से अपने 32 साल के तलाकशुदा भाई से तय कर दी। अब मद्रास हाई कोर्ट ने चुपके से शादी और तलाक को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। जानें पूरा मामला....

शादी और तलाक को लेकर मद्रास हाई कोर्ट का फैसला- India TV Hindi
शादी और तलाक को लेकर मद्रास हाई कोर्ट का फैसला Image Source : FILE PHOTO

एक मां ने अपनी 18 साल की बेटी की शादी चुपके से अपने भाई (बेटी के मामा) से तय कर दी थी, जो 32 साल का तलाकशुदा था। मामले में अहम बात यह भी है कि महिला के इस भाई की पहले उसी के पति की भतीजी से शादी हुई थी, लेकिन वह शादी टूट गई थी और उस भतीजी ने अपने पति के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई पत्नी अपनी बेटी की शादी पति को बताए बिना गुप्त तरीके से चोरी-छिपे तय करती है, तो यह उस पति के साथ क्रूरता है। कोर्ट ने ये भी कहा कि यह मामला पति द्वारा तलाक लेने का भी आधार हो सकता है। हाई कोर्ट के जज जस्टिस सीवी कार्तिकयन और के राजशेखर की डिवीजन बेंच ने एक पारिवारिक मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, "एक पिता के रूप में अपीलकर्ता के दर्द को हम महसूस कर सकते हैं। उसे कभी पता ही नहीं चला कि पत्नी और बेटी घर से चले गए हैं। शादी हो जाने के बाद पिता कोई कदम भी नहीं उठा सकता था। उस समय वह जिस मानसिक वेदना से गुजरा होगा, उसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती।" मामले की सुनवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की और कहा कि ऐसे हालात में पति को बहुत ज्यादा मानसिक तकलीफ होती है।

हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश किया था खारिज

मामले में अदालत ने यह भी पाया कि पत्नी का व्यवहार क्रूरतापूर्ण था। वह न केवल पति को सार्वजनिक रूप से अपमानित करती थी, बल्कि उसने पति के वरिष्ठ अधिकारियों से भी उसकी शिकायत की थी, जिससे पति के लिए उसके साथ रहना मुश्किल हो गया था। फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक अर्जी खारिज कर दी थी और पत्नी के साथ रहने के अधिकार को मंजूरी दी थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के इस आदेश को रद्द करते हुए पति के पक्ष में तलाक की डिक्री जारी कर दी। हाई कोर्ट ने कहा कि पत्नी द्वारा की गई क्रूरता के कामों को जांचने और तौलने का ट्रायल कोर्ट का तरीका काफी नहीं था।

जानें क्या है पूरा मामला?

यह मामला 'जी श्रीधर बनाम एस कोमला कुमारी' का है। दोनों की शादी 1997 में हुई थी और दोनों का एक बेटा और एक बेटी हैं। विवाद तब शुरू हुआ जब पत्नी अपनी 18 वर्षीय बेटी को लेकर एक सप्ताह के लिए बेंगलुरु चली गई और वहां गुपचुप तरीके से उसकी शादी अपने ही भाई से तय कर दी। इस शादी के बारे में न तो पति को पता था और न ही अपने बेटे को।

मां ने जिस व्यक्ति यानी अपने भाई से बेटी की शादी तय की थी, वह 32 वर्षीय शख्स पहले से तलाकशुदा था। उसकी पहली शादी भी परिवार में ही शामिल रिश्ते की भतीजी से हुई थी, जो टूट चुकी थी और उस व्यक्ति के खिलाफ पुलिस शिकायत भी दर्ज थी। इन तमाम बातों के देखते हुए जस्टिस सीवी कार्तिकयन और जस्टिस के राजशेखर की खंडपीठ ने कहा कि एक पिता के रूप में पति ने जो अकल्पनीय मानसिक पीड़ा और दर्द सहा होगा, उसकी कल्पना की जा सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यहां मुद्दा यह नहीं है कि शादी बेटी के भले के लिए थी या नहीं, बल्कि मुद्दा यह है कि एक पिता को उसकी बेटी के जीवन के इतने बड़े फैसले से पूरी तरह बाहर रखा गया।

 

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