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अखिलेश हाथ मिलाने को तैयार लेकिन क्या मायावती भूल पायेंगी स्टेट गेस्ट हाउस कांड?

 Written By: India TV News Desk
 Published : Mar 10, 2017 12:15 pm IST,  Updated : Mar 10, 2017 02:44 pm IST

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद लोगों को परिणामों का इंतजार है। परिणाम 11 तारीख को आएंगे। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव

Akhilesh-Mayawati- India TV Hindi
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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद लोगों को परिणामों का इंतजार है। परिणाम 11 तारीख को आएंगे। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने राज्य में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में नए तरह के गठबंधन के संकेत दिए हैं। कयास लगाए जाने लगे हैं कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी मिलकर सरकार बनाएंगे। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मायावती स्टेट गेस्ट हाउस कांड भूल पायेंगी?

1993 में सपा-बसपा ने मिलकर यूपी में गठबंधन सरकार बनाई थी। लेकिन 1995 में कुछ ऐसा हुआ कि मायावती के लिए मुलायम सिंह राजनीतिक और निजीतौर पर दुश्मन नंबर-1 बन गए।

क्या था 1995 का गेस्ट हाउस कांड?

1993 में सपा-बसपा ने मिलकर सरकार बनाई थी, जो दो साल से ज्यादा नहीं चला पाई। इस दौरान दोनों पार्टियों के बीच विवादों होते रहें, जिसमें मुलायम एवं माया में दुश्मनी की ऐसी दरार पड़ी की दोनों दुश्मन नंबर एक बन गए। जिसमें वर्ष 1995 मायावती राजधानी के स्टेट गेस्ट हाउस में सपा से समर्थन वापसी की घोषणा करने जा रही थी कि सपा कार्यकर्ताओं ने गेस्ट हाउस पर हमला कर दिया।

खुद को बचाने के लिए मायावती ने कमरे में कर लिया था बंद

2 जून 1995 को मायावती लखनऊ के स्टेट गेस्ट हाउस के कमरा नंबर एक में अपने विधायकों के साथ बैठक कर रही थीं। तभी दोपहर करीब तीन बजे कथित समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं की भीड़ ने अचानक गेस्ट हाउस पर हमला बोल दिया। बताया जाता है कि सपा के गुंडों ने मायावती को मारा और उनके कपड़े फाड़ दिए थे। किसी तरह मायावती ने अपने को कमरे में बंद किया था।

सपा कार्यकर्ता तोड़ने लगे थे कमरे का दरवाजा

बताया जाता है कि जब मायावती ने खुद को कमरे में बंद किया तब बाहर से समाजवादी पार्टी के विधायक और समर्थक दरवाजा तोड़ने में लगे हुए थे। प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि सपा के कार्यकर्ता समर्थन वापसी से इतने नाराज थे कि वे गेस्ट हाउस में आग लगाने की तैयारी से आए थे।

बीजेपी नेता ब्रम्हदत्त द्विवेदी ने बचाई जान

इस बीच, कहा जाता है कि अपनी जान पर खेलकर बीजेपी विधायक ब्रम्हदत्त द्विवेदी मौके पर पहुंचे और सपा विधायकों और समर्थकों को पीछे ढकेला। बता दें कि ब्रह्मदत्त द्विवेदी की छवि भी दबंग नेता की थी। इसी घटना के बाद से मायावती, ब्रम्हदत्त द्विवेदी को अपना भाई मानने लगीं। इसके बाद हुए विधान सभा चुनावों में मायावती बीजेपी के समर्थन से प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी।

दर्ज हुई तीन मुकदमे

गेस्टहाउस कांड मामले में हजरतगंज कोतवाली में तीन मुकदमे दर्ज हुए। इस मामले में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव, उनके छोटे भाई शिवपाल यादव, सपा के वरिष्ठ नेता धनीराम वर्मा, आजम खान, बेनी प्रसाद वर्मा जैसे नेता और कई कार्यकर्ता नामजद हुए। इसके बाद बसपा और बीजेपी में मतभेद के चलते यह गठबंधन सरकार भी 18 महीनों में ही गिर गई।

किताब में है डिटेल

गेस्ट हाउस कांड का कई किताबों में जिक्र है। मायावती के जीवन पर आधारित अजय बोस की किताब 'बहनजी' के पेज नंबर 104 और 105 में इस घटना का वर्णन भी किया गया है।

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