भोपाल: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा गृहमंत्री बाबू लाल गौर ने एक बड़ा रहस्योद्घाटन किया है। उन्होंने कहा कि यदि मैं अपने नाम में यादव लिखता तो मुख्यमंत्री न बनता। उन्होंने यह बात बांके बिहारी यादव समाज समिति द्वारा आयोजित एक समारोह में कही। भारतीय जनता पार्टी के नेता गौर ने कहा कि वह यादव हैं, मगर यादव नहीं लिखते। यह उनका टॉप सीक्रेट है, जो आज बता रहे हैं। अगर यादव लिखते होते तो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं बन पाते। पार्टी शायद चुनाव में टिकट तक नहीं देती।
उन्होंने यह यह बात तब कही, जब एक पदाधिकारी ने उन्हें गौर के स्थान पर यादव उपनाम से संबोधित करने की इच्छा जताई। गौर ने आगे कहा कि अगर यादव समाज के लोग गीता का ज्ञान ले लें तो देश में राज करेंगे। इस मौके पर विवाह योग्य युवक-युवतियों का परिचय भी हुआ। इस समारोह में उत्तर प्रदेश और बिहार के यादव समाज के लोग भी मौजूद थे। दरअसल यह वाकया तब हुआ, जब कार्यक्रम में मौजूद एक नेता ने कहा कि वह गौर को यादव उपनाम से संबोधित करना चाहेंगे। इस पर गौर बोले यदि वे यादव उपनाम लिखते होते तो शायद पार्टी उन्हें टिकट ही नहीं देती।
कार्यक्रम में भोपाल विकास प्राधिकरण अध्यक्ष ओम यादव भी मौजूद थे। गृहमंत्री बाबूलाल गौर के बयान पर चुटकी लेते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने कहा कि उनकी (गौर) अभिव्यक्ति बीजेपी की मनुवादी संस्कृति को उजागर करती है। कई ऐसे उदाहरण हैं, जिनमें भ्रष्टाचार के आरोपी मंत्रियों को महज लोकायुक्त की टिप्पणी पर इसलिए हटा दिया क्योंकि वे पिछड़े वर्ग से थे। वैसे भी मध्यप्रदेश में 57 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग हैं, जिनकी उपेक्षा बीजेपी हमेशा से करती आई है।
उल्लेखनीय है कि बाबूलाल गौर 23 अगस्त 2004 से 29 नवंबर 2005 तक मप्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।