राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा. मोहन भागवत ने कहा कि हिन्दुत्व कोई कर्मकांड भी नहीं है लेकिन केवल दुर्बल रहना भी हिन्दुत्व नहीं है, हिन्दुओं को सामर्थ्य सम्पन्न बनना चाहिए, लेकिन कट्टरता का इसमें कोई स्थान नहीं है।
निरालानगर के माधव सभागार में रविवार को यहां लखनऊ विभाग के कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए भागवत ने कहा कि हिन्दुत्व में किसी को लेकर द्वेष की भावना नहीं है और न ही हिन्दुत्व की विचारधारा किसी के विरोध में है। ये सबके प्रति प्रेम, सबके प्रति विश्वास और आत्मीयता सिखाता है।
भागवत ने कहा कि संघ भारत की एकता व अखण्डता को अक्षुण रखने व देश को दुनिया में सर्वोच्च स्थान दिलाने के लिए काम कर रहा है, लेकिन भारत माता की पूजा में विचारों की अपवित्रता नहीं आनी चाहिए। उन्होंने स्वयंसेवकों को मंत्र देते हुए कहा कि समाज सेवा में लगे लोगों को 'इसके बदले में क्या मिलेगा' इस बारे में नहीं सोचना चाहिए। हम हिन्दू राष्ट्र के सम्पूर्ण विकास के लिए कार्य करेंगे।
सरसंघचालक ने कहा कि पूर्वजों ने जिस विचारधारा के आधार पर भारत को बनाने का काम किया है, वही हिन्दुत्व है। संघ हिन्दू समाज को संगठित करने में लगा रहेगा। धर्म संस्कृति व समाज के लिए जो कुछ भी उपयोगी होगा वह सब स्वयंसेवक करेंगे.
भागवत 29 अगस्त को सभी संवैचारिक संगठनों से मुलाकात करेंगे। इसी कड़ी में उनसे भाजपा के यूपी प्रभारी ओम माथुर, प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य व महामंत्री संगठन सुनील बंसल मिलेगे। भाजपा के साथ ही विश्व हिन्दु परिषद, बजरंगदल, भारतीय मजदूर संघ सहित अन्य संगठनों के प्रमुख लोग भी संघ प्रमुख से अलग-अलग मुलाकात करेंगे।