नयी दिल्ली: उद्योगपति विजय माल्या के देश छोड़ कर जाने के पीछे आपराधिक षड्यंत्र होने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने आज कहा कि इस मामले में सरकार को एक पक्ष बनाया जाना चाहिए जबकि वित्त मंत्री अरूण जेटली ने मुख्य विपक्षी दल पर पलटवार करते हुए कहा कि माल्या को ऋण सुविधाएं संप्रग सरकार के शासनकाल में दी गयी थी। राज्यसभा में आज बैठक शुरू होने पर विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा इस सरकार पर मेरा आरोप है कि माल्या के खिलाफ चार चार एजेंसियां, प्रवर्तन निदेशालय, सेबी, एसएफआईओ :गंभीर धोखाधडी जांच कार्यालय: और सीबीआई जांच कर रही थीं तो उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया, उनका पासपोर्ट जब्त क्यों नहीं किया गया?
आजाद ने कहा कि हर व्यक्ति जानता था कि माल्या किसी भी दिन देश छोड़ कर भाग सकते हैं तो जांच एजेंसियों को उनका पासपोर्ट जब्त कर लेना चाहिए था और उन्हें जेल में डाल देना चाहिए था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि माल्या विलासितापूर्ण जीवन जीते हैं और कई देशों में उनके ठिकाने हैं। फिर भी समय रहते कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले इसी सदन में आईपीएल के पूर्व अध्यक्ष ललित मोदी के देश छोड़ कर जाने का मुद्दा उठाया गया था और उन्हें तथा उनके कथित काले धन को वापस लाने की मांग की गई थी। वह वापस नहीं लौटै और लोग भूल भी गए। अब माल्या का मामला सामने है। उन्होंने कहा कि माल्या कोई सुई नहीं हैं और पूरे लावलश्कर के साथ चलते हैं। ताज्जुब की बात यह है कि वह हवाईअड्डे पर किसी को नजर नहीं आए और किस तरह देश छोड़ कर चले गए जबकि सीबीआई ने उनके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया है। उन्होंने कहा कि अटॉर्नी जनरल ने उच्चतम न्यायालय को बताया है कि माल्या के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया गया लेकिन वह देश से भाग गए।
आजाद ने कहा मेरा आरोप है कि यह सरकार माल्या के देश छोड़ कर जाने के आपराधिक षड्यंत्र में एक पक्ष है। इस आपराधिक षड्यंत्र में भारत सरकार को एक पक्ष बनाया जाना चाहिए और उच्चतम न्यायालय को इस पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा मेरा आरोप है कि इस सरकार की सक्रिय भागीदारी और सक्रिय सहयोग के बिना वह देश छोड़ कर नहीं जा सकते थे। इस पर पलटवार करते हुए सदन के नेता और वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि माल्या और उनकी कंपनियों को बैंक रिण की सुविधा सबसे पहले सितंबर 2004 में दी गई और फिर फरवरी 2008 मंे उसका नवीनीकरण किया गया। उन्होंने कहा जांच का विषय यह है कि किन परिस्थितियों में रिण दिए गए और सीबीआई इसकी जांच कर रही है। जेटली ने कहा कि माल्या और उनकी कंपनियों के खाते 30 अप्रैल 2009 को गैर निष्पादित आस्तियां :एनपीए: घोषित किए गए और उन्हीं खातों को 21 दिसंबर 2010 का पुनर्गठन किया गया तथा अन्य सुविधाएं दी गईं। उन्होंने कहा तारीखें अपनी कहानी खुद कहती हैं।
उन्होंने कहा कि देश भर में माल्या और उनकी कंपनियों के खिलाफ 22 मामले दर्ज हैं और कई जगहों पर उनकी संपत्ति कुर्क की गई है। बैंक बकाया राशि की वसूली के लिए कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बैंक ने उच्चतम न्यायालय का रूख किया लेकिन तब तक माल्या देश से जा चुके थे। जिस दिन माल्या देश से बाहर गए उस दिन तक उन्हें रोकने का आदेश किसी भी एजेंसी से नहीं दिया गया था। जेटली ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने ललित मोदी के खिलाफ फेमा के तहत मामला दर्ज किया गया था जिसमें उन्हें रोके जाने या गिरफ्तार किए जाने वाली बात नहीं थी। आजाद ने कहा कि तारीखों का जिक्र कर जेटली यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि इसमें कांग्रेस का हाथ है। उन्होंने कहा कि आज तक का रिकॉर्ड है कि कांग्रेस ने किसी को भी रिण देने के लिए एक फीसदी की भी सिफारिश नहीं की।