नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उप राज्यपाल नजीब जंग में एक बार फिर से ठन गई है। हालत यहां तक पहुंच गई कि नजीब जंग ने अरविंद केजरीवाल को संविधान के मुताबिक काम करने की नसीहत दी है।
केजरीवाल ने दिल्ली सरकार के अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे लेफ्टिनेंट गवर्नर के ऑफिस को फाइलें न भेजें। इस पर जंग ने नाराजगी जताई है।
लेफ्टिनेंट गवर्नर के सचिवालय ने रविवार को आधिकारिक बयान जारी कर अपने अधिकार का दावा पेश किया। मीडिया को जारी स्पष्टीकरण में जंग ने अपने दावे के लिए कानूनों का हवाला देते हुए अपने जरिये फाइलें जाने को सही ठहराया।
जंग ने कहा कि आप प्रशासन को इस संबंध में जारी अपने निर्देश वापस लेने को कहा गया है।
जंग के ऑफिस की तरफ से जारी संक्षिप्त बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल उपराज्यपाल को सलाह देने के लिए हैं। उपराज्यपाल अपने विवेक से काम करने को स्वतंत्र हैं, इसलिए ऐसी सभी फाइलें, जिनके आधार पर विधानसभा में क़ानून बनाए जा सकते हों, उन्हें एलजी के पास अंतिम मंज़ूरी के लिए भेजा जाना चाहिए।
नजीब जंग के दफ्तर की ओर से जारी रिलीज में संविधान, गवर्नमेंट ऑफ एनसीटी एक्ट 1991 और ट्रांजेक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स 1993 का हवाला दिया गया है।
जंग के मुताबिक, इन तमाम प्रावधानों से लेफ्टिनेंट गवर्नर और मुख्यमंत्री के ऑफिस के बीच रिश्तों के बारे में विस्तार से पता चलता है।
इस बीच बीजेपी ने भी एलजी से टकराव को लेकर केजरीवाल पर निशाना साधा है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि केजरीवाल तानाशाही कर रहे हैं।
केजरीवाल और नजीब जंग के बीच टकराव का मामला कोई नया नहीं है। पिछली सरकार में भी जनलोकपाल बिल को विधानसभा में पेश करने से पहले एलजी को दिखाने के मुद्दे पर दोनों में टकराव हो चुका है।