नई दिल्ली: यमुना नदी के खादर में आर्ट ऑफ लीविंग फाउंडेशन द्वारा आयोजित किए जा रहे एक निजी कार्यक्रम को लेकर आज राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण बैठक को शून्यकाल समाप्त होने से ठीक पहले दो मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा। बैठक शुरू होने पर जदयू के शरद यादव और कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद ने यह मुद्दा उठाया और सरकार से इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
सदन के नेता और वित्त मंत्री अरूण जेटली ने इस मुद्दे को उठाये जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा यहां होनी चाहिए या राष्ट्रीय हरित अधिकरण में होनी चाहिए। उन्होंने कहा नियम 169 में साफ कहा गया है कि अगर कोई मामला अदालत में या न्यायाधिकरण में लंबित हो तो उसे सदन में नहीं उठाया जा सकता।
जेटली की इस बात पर असंतोष जताते हुए कांग्रेस, सपा, माकपा और जदयू सदस्य आसन के समक्ष आ कर नारे लगाने लगे। उप सभापति पी जे कुरियन ने आसन के समक्ष हंगामा कर रहे सदस्यों से बार बार आग्रह किया कि वे अपने स्थानों पर लौट जाएं और शून्यकाल चलने दें।
उन्होंने कहा कि सदन को बाधित करने का क्या औचित्य है। यह सही नहीं है। हंगामे के बीच ही शरद यादव ने जेटली के तर्क के जवाब में एक अन्य नियम का हवाला दिया और कहा कि वह सदन को गुमराह कर रहे हैं। कुरियन ने हंगामे के बीच ही शून्यकाल को आगे बढ़ाया।
इस दौरान अन्नाद्रमुक सदस्यों ने अपना मुद्दा उठाया और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए वे आसन के समक्ष आ गए। कुरियन ने हंगामा कर रहे सदस्यों से कहा आप लोग हास्य का पात्र बन रहे हैं।