नई दिल्ली: वरिष्ठ वकील और सांसद राम जेठमलानी ने नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी का बचाव करने की पेशकश की थी लेकिन जब कांग्रेस नेता ने संसद को सामान्य रूप से चलने देने की उनकी सलाह पर गौर नहीं किया, तो उन्होंने अपनी यह पेशकश वापस ले ली। जेठमलानी ने 10 दिसंबर 2015 को सोनिया को लिखे एक पत्र में यह पेशकश की थी और उनसे कहा था कि कांग्रेस नेता के इस रूख पर उनके पास संदेह करने का कोई आधार नहीं है कि भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा उनके तथा राहुल के खिलाफ शुरू किया गया अभियोजन झूठा और दुर्भावनापूर्ण है।
जेठमलानी ने कहा, लेकिन इसे अदालत में स्थापित करना होगा न कि राज्यसभा में शोरगुल और हंगामे से। उन्होंने यह टिप्पणी उस समय की थी जब शीतकालीन सत्र के दौरान कांग्रेस ने राज्यसभा की कार्यवाही को बाधित किया हुआ था। पूर्व भाजपा नेता जेठमलानी ने सोनिया से कहा कि पिछले कुछ दिनों से राज्यसभा में जो हो रहा है, उससे वह एक वरिष्ठ वकील और सांसद होने के नाते खुश नहीं हैं। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि संसद के प्रति जनता का सम्मान प्रभावित हो रहा है और यह भारतीय लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है।
जेठमलानी ने सोनिया को लिखे अपने पत्रों को आज अपने ब्लागस्पॉट पर जारी किया। उन्होंने सोनिया से कहा कि उन्हें न तो किसी फीस की जरूरत है और न ही उनसे कोई अन्य लाभ चाहिए। मेरी सेवाएं राष्ट्र के लिए सेवाएं होंगी। उन्होंने अपने पत्र में कहा, मुझे उम्मीद है कि आप संसद को सामान्य रूप से चलने देंगी। पत्र के आखिर में उन्होंने अपने को भाजपा का निष्कासित सदस्य बताया था और कहा, आप बिहार चुनाव में मेरी भूमिका के बारे में जानती हैं। जेठमलानी ने मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार की वकालत की थी।
दो दिन बाद उन्होंने एक और पत्र सोनिया को लिखा और कहा कि आपने न तो मेरे पत्र की पावती दी और न ही मेरी सलाह का अनुसरण किया। संसद को नहीं चलने दिया गया। अब मैं आपसे किए गए वादे से मुक्त हूं। जेठमलानी ने इसके साथ ही सोनिया का एक पत्र भी जारी किया है जो 11 दिसंबर की तारीख का है। इसमें उन्होंने पत्र मिलने का जिक्र किया और सहायता की उनकी पेशकश की सराहना की है।
जेठमलानी ने कहा था, मैं जानता हूं कि आपकी पार्टी में कई बड़े वकील हैं। फिर भी, अगर आपको आवश्यकता हुईं तो मेरी सेवाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने पत्र में लिखा, आप मेरा पत्र पाकर चकित हो जाएंगी। लेकिन अगर आप मेरी स्वच्छ राजनीति और पेशेवर ईमानदारी को जानें, तो आपको तनिक भी आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
उनकी पेशकश के बारे में कल एक समाचार पत्र ने खबर प्रकाशित की थी। जेठमलानी ने उस समाचार पत्र को आज लिखे एक पत्र में कहा कि उन्होंने सोनिया को निर्दोष होने का कोई प्रमाणपत्र नहीं दिया है। उन्होंने कहा, यह किसी वकील की भूमिका नहीं है। किसी वकील को यह अधिकार नहीं है कि वह अगर किसी को दोषी मानता हो तो सिर्फ इसलिए उसका बचाव करने से इंकार कर दे। उन्होंने कहा, जब श्रीमती गांधी ने संसद को सामान्य ढंग से चलने देने की मेरी सलाह पर गौर नहीं किया तो मैं अपनी पेशकश वापस लेने का हकदार हूं।
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