नई दिल्ली: पूर्व बीजेपी नेता और संघ विचारक एन गोविंदाचार्य ने गोहत्या के लिए हिंदूओं को जिम्मेदार ठहराते हुये कहा है कि गोरक्षा एक धार्मिक मुद्दा नहीं है लेकिन इसे धार्मिक बनाया जा रहा है। गोविंदाचार्य के मुताबिक इस मुद्दे के लिए मुसलमानों को गलत रूप से ज़िम्मेदार ठहराया जाता है। उन्होंने कहा कि गाय को स्लॉटर हाउस तक पहुचाने की लंबी प्रक्रिया में 80 फीसदी हिंदू शामिल हैं जबकि बहुत थोड़े मुसलमान गौ से जुड़े हैं।
गोविंदाचार्य ने ये भी कहा कि उन्होंने देश में गोवंश रक्षा की मांग के लिए जंतर मंतर पर सात नवंबर से आयोजित होने वाला धरना स्थगित कर दिया गया है। गोविंदाचार्य ने कहा कि गऊ राजनीतिक पशु नहीं है और इस पर सियासत ठीक नहीं है।
गोविंदाचार्य ने अपने बयान में कहा, ‘गोरक्षा के विषय पर हो रही राजनीति देश के लिए ठीक नहीं है। गऊ राजनीतिक पशु नहीं है जिसके नाम पर राजनीति और सम्प्रदाय का खेल खेला जाए।’ उन्होंने कहा कि गोरक्षा का मामला आस्था के साथ सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था से जुड़ा है। यह राजनीति और सम्प्रदाय के दायरे से ऊपर है। इस विषय पर राजनीति ठीक नहीं है।
उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने देश की खेती को बर्बाद करने के लिए गोवंश को खेती से हटाने की साजिश रची थी ताकि देश आर्थिक रूप से कमजोर और पराश्रित हो जाए। यह देश के लोगों को समझना चाहिए। गोरक्षा की दिशा में सार्थक पहल किये जाने की जरूरत है।
गोरक्षा पर आंदोलन चलाने वाली राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन ने कहा है कि देश में गोवंश की रक्षा की मांग को लेकर सात नवंबर से जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन का आयोजन किया जाना था लेकिन इस विषय पर अत्यधिक राजनीति होने और इसका साम्प्रदायिकरण होने के मद्देनजर इसे स्थगित किया जा रहा है।