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Aap Ki Adalat: MBBS की पढ़ाई छोड़ी, डिप्टी कलेक्टर के पद को ठुकराया, मोहन यादव ने सुनाई पूरी कहानी

 Written By: Avinash Rai @RaisahabUp61
 Published : Aug 30, 2025 10:15 pm IST,  Updated : Aug 30, 2025 11:24 pm IST

इंडिया टीवी के चर्चित शो आप की अदालत में इस बार पहुंचे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव। इस दौरान उन्होंने रजत शर्मा के तीखे सवालों का बखूबी जवाब दिया।

Aap Ki Adalat Madhya Pradesh cm mohan Yadav interview- India TV Hindi
सीएम मोहन यादव Image Source : INDIA TV

इंडिया टीवी के चर्चित शो आप की अदालत में आज हमारे मेहमान बने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव। इस दौरान इंडिया टीवी के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा ने सीएम मोहन यादव से कई तीखे सवाल किए। इस दौरान सीएम मोहन यादव ने रजत शर्मा के सवालों का बखूबी जवाब दिया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने ये भी बताया कि उन्होंने किस स्तर की पढ़ाई की है। सीएम मोहन यादव ने कहा, 'साल 1982 में मेरा मेडिकल कॉलेज में एडमिशन हो गया था। उस समय पीएमटी होती थी। मैंने पीएमटी का एग्जाम क्लीयर किया और वहां एडमिशन हो गया।'

डिप्टी कलेक्टर का पद छोड़ दिया मोहन यादव ने

मोहन यादव ने बताया कि एमबीबीएस में एडमिशन होने के बाद दोस्तों ने कहा कि चुनाव लड़ना है। इसलिए बीएससी में एडमिशन ले लिया। एमबीबीएस छोड़ दिया। सेकेंड ईयर में प्रेसिडेंट बना। बीएससी करने के बाद आगे की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने बताया कि साल 1986 में एमपीपीएससी के माध्यम से मुझे बताया कि आपने बीएसएसी एलएलबी कर लिया है तो आप डिप्टी कलेक्टर बन जाइए। नेता कोई नहीं बनना चाहता। इसलिए मैं डिप्टी कलेक्टर नहीं बना। मोहन यादव ने आगे कहा कि ये बात सही है कि हमने स्कूली जीवन से लगाकर करके जब मैं टूरिज्म का चेयरमैन बना या शिक्षा मंत्री बना, तबतक मैं नाटक करता रहा।

सेल्फ डिफेंस में माहिर हैं मोहन यादव

सीएम मोहन यादव ने कहा कि जब 100-200 कलाकारों के साथ काम करने के लिए बड़ा मंच तैयार करते हैं। जब मैं ये सोचता हूं कि छोटे से छोटा कलाकार काम करता है तो बड़े लोगों को भी उसमें जुड़ना चाहिए। उन्होंने बताया कि उनके पिताजी उन्हें पहलवान बनाना चाहते थे। यादव बंधु हैं तो खाने पीने में दूध, दही, घी पर्याप्त है। पिताजी का कहना था कि शरीर को मजबूत रखो। उन्होंने कहा कि तलवारबाजी में मुझे मजा आता है। दोनों हाथों से तलवार चला लेते हैं। ये हमारे अंगों को खोलने के तरीके भी हैं। सेल्फ डिफेंस की दृष्टि से और विश्वास की दृष्टि से ये अहम है।

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