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'मैं जमीयत को अपनी बूढ़ी उंगली दिखाता हूं', असम के मुख्यमंत्री हिमंत ने दिया बड़ा बयान

 Published : Aug 23, 2025 06:54 pm IST,  Updated : Aug 23, 2025 06:54 pm IST

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की मांगों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें जमीयत की परवाह नहीं। बेदखली कार्रवाई के विरोध में जमीयत ने उनके खिलाफ कार्रवाई और इस्तीफे की मांग की थी। शर्मा ने तीखा बयान देते हुए कहा, 'मैं जमीयत को बूढ़ी उंगली दिखाता हूं।'

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असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा। Image Source : PTI

गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की उस मांग को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उनके खिलाफ 'हेट स्पीच' का मुकदमा दर्ज करने और इस्तीफे की बात कही गई थी। जमीयत ने यह मांग राज्य में चल रही बेदखली की कार्रवाई को लेकर की थी जिसके कारण हजारों लोग बेघर हुए हैं। शर्मा ने जमीयत के अध्यक्ष महमूद मदनी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अगर उन्हें मदनी मिले, तो वह उन्हें बांग्लादेश भेज देंगे। मोरिगांव में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए शर्मा ने कहा, 'मैं जमीयत को अपनी ‘बूढ़ी उंगली’ दिखाता हूं।'

क्या होता है बूढ़ी उंगली दिखाने का मतलब?

बता दें कि असमिया में ‘बूढ़ी उंगली’ दिखाने का मतलब होता है किसी की मांग या बात को पूरी तरह नजरअंदाज करना। उन्होंने जोर देकर कहा, 'मेरी इस उंगली में असमिया खून, ताकत और हिम्मत है। मुझे इस बात की जरा भी परवाह नहीं कि जमीयत क्या मांग कर रही है।' 1919 में स्थापित जमीयत उलेमा-ए-हिंद भारत के मुसलमानों की सबसे बड़ी और प्रभावशाली संस्था मानी जाती है। इस संगठन ने बुधवार को अपनी कार्यकारी समिति की बैठक में असम में चल रही बेदखली की कार्रवाई पर चिंता जताई थी। इस कार्रवाई में करीब 50,000 परिवार बेघर हो गए हैं, जिनमें ज्यादातर बंगाली भाषी मुसलमान हैं।

जमीयत ने हिमंत पर पारित किया था प्रस्ताव

जमीयत ने एक प्रस्ताव पारित कर भारत के राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अपील की थी कि हिमंत विश्व शर्मा को तुरंत पद से हटाया जाए और उनके खिलाफ नफरत भरे भाषण के लिए कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके जवाब में शर्मा ने कहा, 'असम का मुख्यमंत्री कौन होगा, यह असम की जनता तय करेगी, न कि जमीयत के अध्यक्ष महमूद मदनी। मैं सिर्फ इतना कहूंगा कि मुझे जमीयत या किसी और की परवाह नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई असम के मुख्यमंत्री पर हमला करता है, चाहे वह किसी भी पार्टी से हो, तो असम के लोग इसका विरोध करेंगे, क्योंकि मुख्यमंत्री को जनता ने चुना है, न कि जमीयत ने।

'अनजान लोगों के सरकार हैं कांग्रेसी नेता'

शर्मा ने कांग्रेस को जमीयत का ‘बी-टीम’ करार दिया और कहा कि कांग्रेस ने इस मुद्दे पर एक भी बयान नहीं दिया। उन्होंने कहा, 'जब जागीरोड में सेमीकंडक्टर फैसिलिटी आई, तो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे ने इसका विरोध किया और असम कांग्रेस के नेताओं ने भी उनकी हां में हां मिलाई।' शर्मा ने असम के कांग्रेस नेताओं को ‘अनजान लोगों का सरदार’ बताते हुए कहा कि वे मूल असमिया लोगों के प्रतिनिधि नहीं हैं, बल्कि ‘अनजान लोगों’ के साथ रहना चाहते हैं। हालांकि, शर्मा ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनके बयान में ‘अनजान लोग’ से उनका मतलब किससे है।

बेदखली पर सख्त रुख अपनाए हुए हैं शर्मा

गौरतलब है कि स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में भी उन्होंने ‘अनजान लोग’ का जिक्र किया था, जिसे बंगाली भाषी मुसलमानों की ओर इशारा माना गया। दरअसल, असम में हाल के महीनों में बेदखली की कार्रवाई तेज हुई है, जिसके तहत अवैध रूप से बसी बस्तियों को हटाया जा रहा है। जमीयत का दावा है कि इस कार्रवाई में ज्यादातर बंगाली भाषी मुसलमान प्रभावित हुए हैं, जिनमें से कई दशकों से असम में रह रहे हैं। इस मुद्दे पर असम सरकार और विभिन्न संगठनों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। वहीं, शर्मा के रुख से साफ है कि वह किसी भी दबाव में झुकने को तैयार नहीं हैं और इस मुद्दे पर उनकी सरकार का रवैया सख्त रहेगा। (PTI)

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