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47 साल की मां ने जीती मैराथन, चप्पल टूटने पर नंगे पैर दौड़ी लेकिन बच्ची की फीस का इंतजाम करने के लिए सहा दर्द

 Written By: Rituraj Tripathi
 Published : Sep 01, 2026 12:14 am IST,  Updated : Sep 01, 2026 12:14 am IST

महाराष्ट्र के बीड जिले में अंबाजोगाई में एक मैराथन आयोजित की गई थी। यहां खाना बनाने वाली एक मां चप्पल पहनकर दौड़ी और जब चप्पल टूट गई तो नंगे पैर दौड़ी और मैराथन जीत ली।

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47 साल की मां ने मैराथन जीती, चप्पल टूटने पर नंगे पैर दौड़ी Image Source : REPORTER INPUT

बीड: न महंगे स्पोर्ट्स शूज, न ट्रैकसूट और न ही कोई प्रशिक्षक...हाथ में थी तो सिर्फ रोजाना की मेहनत की ताकत और मन में दो बेटियों के भविष्य की चिंता! इसी जिद और हौसले के दम पर   महाराष्ट्र के बीड जिले में अंबाजोगाई में आयोजित मैराथन प्रतियोगिता में खाना बनाने का काम करने वाली 47 वर्षीय रमाबाई रणवीर ने साड़ी पहनकर और चप्पल हाथ में लेकर नंगे पांव दौड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया और 3 हजार रुपये का पुरस्कार जीता।

रमाबाई की जीत से भावुक हुए लोग

पेशेवर तैयारी करने वाले युवक-युवतियों को पीछे छोड़कर रमाबाई की इस शानदार जीत ने वहां मौजूद लोगों की आंखों में आंसू ला दिए। पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

अंबाजोगाई स्थित भारतीय शिक्षण प्रसारक संस्था के खोलेश्वर शैक्षणिक संकुल के अमृत महोत्सवी वर्ष के अवसर पर शनिवार सुबह छत्रपति शिवाजी महाराज चौक से भगवानबाबा चौक के बीच ‘अमृत दौड़’ मैराथन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था।

इसी भीड़ में सबसे पीछे साधारण साड़ी पहने रमाबाई खड़ी थीं। लोगों को लगा कि वह शायद केवल देखने या मनोरंजन के लिए आई होंगी। लेकिन जैसे ही झंडा लहराया और सीटी बजी, रमाबाई दौड़ पड़ीं और देखते ही देखते उन्होंने प्रतियोगिता जीत ली।

दौड़ के दौरान उनकी चप्पल पैर से निकलने लगी। इसलिए उन्होंने चप्पल हाथ में ले ली और नंगे पांव दौड़ना शुरू कर दिया। शुरुआत में कई युवक-युवतियां तेजी से आगे निकल गए थे। लेकिन कुछ दूरी तय करने के बाद रमाबाई ने अपनी रफ्तार बढ़ाई और एक-एक कर ट्रैकसूट पहने प्रतिभागियों को पीछे छोड़ना शुरू कर दिया।

ठंडी सड़क और पैरों में चुभने वाले पत्थरों की परवाह नहीं की

बारिश के कारण ठंडी हुई सड़क और पैरों में चुभने वाले पत्थरों की परवाह किए बिना, साड़ी का पल्लू संभालते हुए वह लगातार दौड़ती रहीं। आखिरकार उन्होंने फिनिशिंग लाइन पर सबसे पहले पहुंचकर पहला स्थान हासिल किया।

जब आयोजकों ने उन्हें प्रथम पुरस्कार प्रदान किया, तो रमाबाई ने भावुक होकर कहा, “बच्चों के भविष्य के लिए रोज भागदौड़ करती हूं, आज खुद के लिए दौड़ी।”

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Image Source : REPORTER INPUTमैराथन जीतने वाली मां, खाना बनाने का काम करती है

बेटियों की पढ़ाई के लिए छोड़ा हिंगोली, पति का हो चुका है निधन

पति के निधन के बाद दोनों बेटियों को पढ़ाकर बड़ा करने की पूरी जिम्मेदारी रमाबाई के कंधों पर आ गई। बेटियों की शिक्षा का बड़ा सवाल सामने होने के कारण उन्होंने अपना मूल गांव हिंगोली छोड़कर अंबाजोगाई में रहने का फैसला किया।

अंबाजोगाई में वह ज्ञानदीप अकादमी में खाना बनाने का काम करती हैं और इसी से अपने परिवार का भरण-पोषण करती हैं। बेटियों के बेहतर भविष्य के लिए उनकी यह मेहनत और मैराथन में हासिल की गई जीत हर किसी के लिए प्रेरणादायक बन गई है।

इससे पहले एक बार खबर आई थी कि मुंबई में मैराथन दौड़ में हिस्सा ले रहे एक 75 वर्ष के बुजुर्ग की हार्टअटैक से मौत हो गई। ऐसे में ये ध्यान रखें कि अगर आप हार्ट के मरीज हैं तो ना दौड़ें। (रिपोर्ट- आमिर हुसैन)

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