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अश्विनी बिद्रे हत्याकांड में सजा का ऐलान, दोषी पूर्व पुलिस अधिकारी को उम्रकैद की सजा

 Edited By: Amar Deep
 Published : Apr 21, 2025 04:23 pm IST,  Updated : Apr 21, 2025 05:03 pm IST

महाराष्ट्र में असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर अश्विनी बिद्रे की हत्या के मामले में सात साल बाद सजा का ऐलान किया गया है। कोर्ट ने दोषी पूर्व पुलिस अधिकारी अभय कुरुंदकर को आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है।

दोषी पूर्व पुलिस अधिकारी को उम्रकैद की सजा।- India TV Hindi
दोषी पूर्व पुलिस अधिकारी को उम्रकैद की सजा। Image Source : FILE

महाराष्ट्र पुलिस में असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर अश्विनी बिद्रे हत्याकांड मामले में कोर्ट ने सजा का ऐलान कर दिया है। पनवेल सेशन कोर्ट ने सात साल बाद अपना फैसला सुनाया है। कोर्ट ने हत्या के मामले में दोषी अभय कुरुंदकर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। वहीं कोर्ट ने अभय कुरुंदकर के अलावा बाकी दो दोषियों कुंदन भंडारी और महेश फलनिकर को 7 साल के जेल की सजा सुनाई है। दोनों दोषी 7 साल से जेल में थे, इसलिए उन्हें अब जेल से बाहर भेजा जाएगा। दोनों को आज ही छोड़ दिया जाएगा। अभय कुरूंदकर को अन्य धाराओं के तहत भी सजा सुनाई गई है।

2016 में हुई थी हत्या

दरअसल, अश्विनी बिद्रे नवी मुंबई के मानवाधिकार प्रकोष्ठ में तैनात थी। इसी बीच 11 अप्रैल 2016 को असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर अश्विनी बिद्रे अचानक लापता हो गई थीं। वहीं जब मामले की जांच शुरू हुई तो पुलिस ने अश्विनी बिद्रे के ड्राइवर कुरुंदकर भंडारी और उसके दोस्तों के खिलाफ केस दर्ज किया। इसमें ज्ञानदेव पाटिल और फलाणीकर का नामभी शामिल था। हालांकि बाद में ज्ञानदेव पाटिल को बरी कर दिया गया था। पुलिस ने खुलासा करते हुए बताया कि कुरुंदकर और अश्विनी बिद्रे के बीच एक्स्ट्रामैरिटल अफेयर थे। 

शव को काटकर फ्रिज में रखा

बता दें कि अभय कुरुंदकर ने 11 अप्रैल, 2016 को ठाणे जिले के भयंदर में अश्विनी बिद्रे की हत्या कर दी थी। अपने दोस्तों के साथ मिलकर अभय कुरुंदकर ने मुकुंद प्लाजा में अश्विनी बिद्रे की हत्या की घटना को अंजाम दिया था। वहीं हत्या के बाद कुरुंदकर ने अश्विनी बिद्रे के शरीर को कई टुकड़ों में काटा और फिर उसे एक फ्रिज में रख दिया। कुछ दिन के बाद उसने शव को भयंदर खाड़ी में फेंक दिया। बता दें कि अभय कुरुंदकर को 2017 के गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया था। वहीं कुरुंदकर को इस मामले में 7 दिसंबर 2017 को गिरफ्तार किया गया।

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