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भारत से टक्कर लेने की कोशिश में पाकिस्तान से हुई बड़ी गलती, तंगी के बीच बढ़ गया घाटा

मलेशिया के द्वारा पाकिस्तान का पक्ष लेने और भारत के घरेलू मामलें में बयान बाजी के बाद भारत ने पाम तेल के आयात पर सख्त रुख अपनाया था। जिसके जबाव में पाकिस्तान ने मलेशिया से पाम तेल की खरीद बढ़ा दी। हाल ये है कि अब आयात बिल बढ़ने के साथ पाकिस्तान का सरकारी घाटा भी बेकाबू होने जा रहा है।

India TV Paisa Desk India TV Paisa Desk
Updated on: February 18, 2021 15:05 IST
पाकिस्तान का व्यापार...- India TV Paisa
Photo:PTI

पाकिस्तान का व्यापार घाटा अनुमान से ज्यादा होने की आशंका

नई दिल्ली। इंटरनेशनल कारोबार में भारत को टक्कर देने के चक्कर में पाकिस्तान ने अपनी हालत पस्त कर ली है। डॉन में छपी खबर के मुताबिक पाकिस्तान का खाद्य पदार्थों का आयात बिल 51 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गया है। इसमें भी पाम तेल का आयात 37 प्रतिशत बढ़ा है। आपको बता दें कि कश्मीर पर मलेशिया के नेतृत्व की बयानबाजी के बाद भारत  मलेशिया से पाम खरीद पर सख्त हो गया था। जिसके बाद इमरान खान ने ऐलान किया था कि वो मलेशिया से पाम तेल खरीद कर मलेशिया का नुकसान भरेंगे। हाल ये ही कि अब पाम तेल का आयात बढ़ाने के साथ ही पाकिस्तान का व्यापार घाटा अनुमान से कहीं ज्यादा होने जा रहा है।  

पाकिस्तान का खाद्य पदार्थों का आयात बिल बढ़ा

पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टेटिस्टिक्स के द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2020-21 (जुलाई-जून) के पहले 7 महीने में खाद्य पदार्थों का आयात बिल पिछले साल के मुकाबले 51.9 प्रतिशत बढ़कर 464 करोड़ डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। सबसे ज्यादा उछाल खाद्य तेलों में देखने को मिला है। इसके अलावा पाकिस्तान ने गेहूं, चीनी, मसाले और चाय का आयात भी बढ़ाया है। इससे वित्तीय वर्ष के लिए व्यापार घाटा अनुमान से ज्यादा रहने की आशंका बन गई है।

पाम तेल का आयात बिल 37 प्रतिशत बढ़ा

आंकड़ों के मुताबिक अवधि के दौरान पाकिस्तान के पाम ऑयल का आयात बिल पिछले साल के मुकाबले 37 प्रतिशत बढ़कर 136 करोड़ डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है, जो कि पिछले साल इसी अवधि में 100 करोड़ डॉलर के स्तर पर था। आयात किए गए तेल की मात्रा में भी पिछले साल के मुकाबले करीब 10 प्रतिशत की बढ़त रही है।

क्या है भारत-मलेशिया और पाम तेल का मामला

इंडोनेशिया और मलेशिया पाम तेल के सबसे बड़े उत्पादक देश हैं। वहीं भारत दुनिया का सबसे बड़ा वनस्पति तेलों का आयातक देश है। पिछले साल की शुरुआत में मलेशिया ने धारा 370 और नागरिकता कानून को लेकर भारत की अंतर्राष्ट्रीय मंच पर आलोचना की थी। वहीं संयुक्त राष्ट्र के एक कार्यक्रम में मलेशिया ने पाकिस्तान का पक्ष लेकर भारत की आलोचना की थी। जिसके जवाब में भारत ने मलेशिया से पाम तेल के आयात पर रोक लगा दी थी। बाद के महीनों में मलेशिया के नरम रुख के बाद पाम तेल का आयात फिर शुरू हुआ। हालांकि घरेलू इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए बजट में किए गए नए प्रावधानों से मलेशिया से पाम आयल के इंपोर्ट पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

पाकिस्तान का कौन सा दांव पड़ा उल्टा

पिछले साल फरवरी में भारत के द्वारा मलेशिया पर कारवाई से भड़के पाकिस्तान ने भारत का विकल्प बनने की कोशिश की थी। फरवरी में इमरान खान ने बयान दिया था कि वो भारत की वजह से मलेशिया का होने वाला नुकसान भरेगा और मलेशिया से पाम तेल की खरीद बढ़ाएगा। इमरान खान ने ये ऐलान मलेशिया के प्रधानमंत्री के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया था। पाम तेल का आयात तो बढ़ा लेकिन इसी के साथ पाकिस्तान का सरकारी घाटा अनुमान से कहीं ज्यादा होने की आशंका बन गई है।

 

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