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वित्त मंत्री 23 अगस्त को राष्ट्रीय मौद्रिकरण पाइपलाइन का करेंगी शुभारंभ, बिक्री योग्य एसेट्स होंगे लिस्ट

बजट भाषण मे वित्त मंत्री ने कहा था कि नए इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के निर्माण में जरूरी फाइनेंस के लिये परिचालन कर रही संपत्तियों का मॉनिटाइजेशन एक अहम विकल्प है।

India TV Paisa Desk Edited by: India TV Paisa Desk
Published on: August 22, 2021 18:14 IST
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Photo:PTI

सोमवार को लॉन्च होगा एनएमपी

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोमवार को राष्ट्रीय मौद्रिकरण पाइपलाइन (एनएमपी) का शुभारंभ करेंगी। इसके जरिये अगले चार वर्षों में बेची जाने वाली सरकार की बुनियादी ढांचा संपत्तियों की सूची तैयार की जाएगी। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गयी।

नीति आयोग ने रविवार को एक बयान में कहा, "एनएमपी में केंद्र सरकार की पुरानी बुनियादी ढांचा परिसंपत्तियों की चार साल की पाइपलाइन शामिल है। निवेशकों को आगे की दृष्टि प्रदान करने के अलावा, एनएमपी सरकार की संपत्ति के मौद्रिकरण की पहल के लिए मध्यम अवधि की रूपरेखा के रूप में भी काम करेगी।" निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव तुहिन कांत पांडेय ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों और पावर ग्रिड पाइपलाइनों सहित छह लाख करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा संपत्तियों को अंतिम रूप दे रही है, जिनका मौद्रिकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा था, "लगभग 6,000 करोड़ रुपये की एक राष्ट्रीय मौद्रिकरण योजना पर काम चल रहा है, जिसमें पाइपलाइन से लेकर पावर ग्रिड पाइपलाइन और राष्ट्रीय राजमार्ग से लेकर टीओटी (टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर) और इसी तरह की कई संपत्तियां होंगी।" 

आम बजट 2021-22 में बुनियादी ढांचे के लिए नवीन और वैकल्पिक वित्तपोषण जुटाने के साधन के रूप में परिसंपत्ति मौद्रिकरण पर काफी जोर दिया गया था। सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा था कि नए बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की परिचालन वाली संपत्तियों का मौद्रिकरण एक बहुत ही महत्वपूर्ण फाइनेंसिंग विकल्प है। 

वहीं वित्त मंत्री 25 अगस्त को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक प्रमुखों के साथ बैठक करेंगी। बैठक का मकसद बैंकों के प्रदर्शन और कोविड-19 महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्था को गति देने के मामले में हुई प्रगति की समीक्षा करना है। सूत्रों ने कहा कि मांग और खपत बढ़ाने के लिये बैंक क्षेत्र के महत्व को देखते हए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के प्रबंध निदेशकों और मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) के साथ बैठक महत्वपूर्ण है। पिछले साल मार्च में महामारी शुरू होने के बाद से यह वित्त मंत्री और सरकारी बैंकों के प्रमुखों की आमने-सामने की पहली समीक्षा बैठक है। हाल ही में सीतारमण ने कहा था कि सरकार कोविड-19 महामारी से प्रभावित आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिये हर जरूरी कदम उठाने को तैयार है। सूत्रों के अनुसार बैठक में बैंक की स्थिति, रिजर्व बैंक द्वारा घोषित पुनर्गठन- दो योजना की प्रगति की समीक्षा किये जाने की उम्मीद है। बैठक में बैंकों को उत्पादक क्षेत्रों को कर्ज बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है। उसने कहा कि मुंबई में होने वाली बैठक में इसके अलावा आपात ऋण सुविधा गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) की भी समीक्षा की जाएगी। सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्री फंसे कर्ज या एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) की स्थिति की भी जायजा ले सकती हैं। इसके अलावा बैंकों के विभिन्न सुधार उपायों पर भी चर्चा होने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि सरकार के विभिन्न प्रायासें से बैंकों का फंसा कर्ज 31 मार्च, 2021 को घटकर 6,16,616 करोड़ रुपये (अस्थायी आंकड़ा) पर आ गया जो 31 मार्च, 2020 को 6,78,317 करोड़ रुपये था। वहीं 31 मार्च, 2019 को 7,39,541 करोड़ रुपये पर था।

 

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