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क्या चेक बाउंस होने का असर आपके सिबिल स्कोर पर भी पड़ता है? जानें जरूरी बातें

 Published : Mar 16, 2026 07:10 am IST,  Updated : Mar 16, 2026 08:18 am IST

जब बैंक चेक को क्लियर नहीं कर पाता तो वह स्थिति चेक बाउंस की होती है। ऐसा होने के कई कारण हैं। इसमें सबसे खास वजह बैंक अकाउंट में पर्याप्त पैसे न होना है।

चेक बाउंस तब होता है जब बैंक चेक को क्लियर नहीं कर पाता। - India TV Hindi
चेक बाउंस तब होता है जब बैंक चेक को क्लियर नहीं कर पाता। Image Source : FREEPIK

क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आपने कोई चेक जारी किया और वह बाउंस हो गया? यह स्थिति न सिर्फ शर्मिंदगी और असहजता पैदा करती है, बल्कि बैंक से जुर्माना, अतिरिक्त चार्ज और कई बार कानूनी झंझट भी ला सकती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल जो ज्यादातर लोगों के मन में आता है, क्या चेक बाउंस होने से मेरा सिबिल स्कोर खराब हो जाता है? इसका जवाब जानना जरूरी है, ताकि आप घबराएं नहीं और सही तरीके से स्थिति संभाल सकें।

CIBIL स्कोर क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण होता है?

CIBIL स्कोर एक 3 अंकों की (300 से 900 के बीच) एक संख्या है, जो आपकी क्रेडिट हिस्ट्री और कर्ज चुकाने की क्षमता को दर्शाता है।  750+ स्कोर को अच्छा माना जाता है।  इससे बैंक या वित्तीय संस्थान आपको भरोसेमंद मानते हैं, जिससे लोन, क्रेडिट कार्ड आसानी से और बेहतर ब्याज दर पर मिल जाते हैं। बैंक लोन या क्रेडिट कार्ड देते समय मुख्य रूप से भुगतान इतिहास, क्रेडिट उपयोग अनुपात, लोन की विविधता और समय पर पेमेंट जैसे फैक्टर्स देखते हैं।

चेक बाउंस कब और क्यों होता है?

चेक बाउंस तब होता है जब बैंक चेक को क्लियर नहीं कर पाता। इसके पीछे मुख्य कारण वजह अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस न होना, हस्ताक्षर में मिलान न होना , गलत/अमान्य तारीख, ओवरराइटिंग या राशि में अंकों-शब्दों का अंतर, खाता बंद, फ्रीज या ब्लॉक होना हो  सकती है। herofincorp के मुताबिक, यह सामान्य बैंकिंग ट्रांजैक्शन है, लेकिन नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत अगर प्राप्तकर्ता शिकायत करता है, तो कानूनी नोटिस, जुर्माना (चेक राशि का दोगुना तक), या अदालत/जेल तक की कार्रवाई हो सकती है।

क्या चेक बाउंस से CIBIL स्कोर पर सीधा असर पड़ता है?

इसका सीधा उत्तर है, नहीं। चेक बाउंस होने से CIBIL स्कोर प्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित नहीं होता।  CIBIL (TransUnion CIBIL) और अन्य क्रेडिट ब्यूरो सिर्फ क्रेडिट से जुड़े लेन-देन ट्रैक करते हैं- जैसे लोन, क्रेडिट कार्ड, EMI, बिल पेमेंट की हिस्ट्री। सामान्य सेविंग/करंट अकाउंट से जुड़े चेक बाउंस की जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट नहीं की जाती। इसलिए एक सामान्य चेक बाउंस (जैसे किसी को पैसे देने का) आपके क्रेडिट रिपोर्ट में नहीं दिखता और स्कोर पर तुरंत असर नहीं डालता। लेकिन अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है, अगर चेक किसी लोन की EMI, क्रेडिट कार्ड बिल या कोई क्रेडिट पेमेंट के लिए दिया था और बाउंस होने से वह पेमेंट मिस हो गया, तो डिफॉल्ट रिपोर्ट होगा। इससे स्कोर 20-100 अंक तक गिर सकता है।  बार-बार चेक बाउंस होने पर बैंक आपको जोखिम भरा ग्राहक मान सकता है, जिससे भविष्य में लोन/ओवरड्राफ्ट मिलना मुश्किल हो जाता है- यह अप्रत्यक्ष रूप से क्रेडिट प्रोफाइल को प्रभावित करता है।

ऐसी स्थिति में क्या करें?

तुरंत खाते में पर्याप्त बैलेंस डालें और प्राप्तकर्ता को वैकल्पिक पेमेंट करें।  बैंक से बाउंस चार्ज और कारण पूछें, जरूरत पड़ने पर रिक्वेस्ट करें कि वे इसे टेक्निकल मानकर रिपोर्ट न करें (अगर EMI से जुड़ा है)।  चेक बार-बार बाउंस न होने दें- डिजिटल पेमेंट्स (UPI, ऑटो-डेबिट) का इस्तेमाल करें। अपना CIBIL रिपोर्ट नियमित चेक करें और कोई गलती दिखे तो सुधारें। अगर कानूनी नोटिस आया है, तो तुरंत भुगतान करके समझौता करने की कोशिश करें।

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