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FATF से भारत को मिली अच्छी रेटिंग से घरेलू कंपनियों को फायदा, अब खूब आएगा विदेशी निवेश

Edited By: Pawan Jayaswal Published : Jun 28, 2024 10:18 pm IST, Updated : Jun 28, 2024 10:19 pm IST

वित्त मंत्रालय ने कहा कि एफएटीएफ पारस्परिक मूल्यांकन में भारत का प्रदर्शन बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिहाज से खासा अहम है, क्योंकि यह वित्तीय प्रणाली की समग्र स्थिरता और अखंडता को दर्शाता है।

फाइनेंशियल एक्शन...- India TV Paisa
Photo:REUTERS फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स

भारत को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स से मिली अच्छी रेटिंग से घरेलू कंपनियों को अधिक जांच-पड़ताल से गुजरे बगैर विदेशी निवेश हासिल करने में मदद मिलेगी। उच्च पदस्थ सूत्रों ने शुक्रवार को यह बात कही। उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण के खिलाफ भारत के अभियान को मान्यता देने वाली एफएटीएफ की रिपोर्ट को संतोषजनक और अनुकरणीय बताया। एफएटीएफ की सिंगापुर में हुई पूर्ण बैठक के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग पर भारत की पारस्परिक मूल्यांकन रिपोर्ट को स्वीकार करने के साथ आतंक के वित्तपोषण के खिलाफ उठाए गए इसके कदमों की प्रशंसा की।

इस मुद्दे से निपटने की जरूरत

वैश्विक संस्था ने एक संक्षिप्त बयान में कहा कि भारत इन दोनों ही क्षेत्रों में अच्छे नतीजे हासिल कर रहा है। हालांकि, एफएटीएफ ने कहा कि भारत को धनशोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण के मुकदमों की सुनवाई पूरी करने में होने वाली देरी के मुद्दे से निपटने की जरूरत है। सूत्रों ने अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्था द्वारा उठाए गए मुद्दों के संबंध में कहा कि ये मूलभूत या महत्वपूर्ण खामियां नहीं हैं। एफएटीएफ ने कहा है कि भारत अपने मानदंडों के साथ 'तकनीकी अनुपालन' के उच्च स्तर पर पहुंच गया है और मनी लॉन्ड्रिंग एवं आतंकी फंडिंग के खिलाफ भारत की कोशिशों के बढ़िया नतीजे आ रहे हैं।

भारत की परफॉर्मेंस बढ़ती इकोनॉमी के लिहाज से अहम

इस बीच वित्त मंत्रालय ने कहा कि एफएटीएफ पारस्परिक मूल्यांकन में भारत का प्रदर्शन बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिहाज से खासा अहम है, क्योंकि यह वित्तीय प्रणाली की समग्र स्थिरता और अखंडता को दर्शाता है। मंत्रालय ने बयान में कहा, "अच्छी रेटिंग से वैश्विक वित्तीय बाजारों और संस्थानों तक बेहतर पहुंच होगी और निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।" एफएटीएफ के मूल्यांकन के चौथे दौर में जी-20 समूह के 17 देशों का मूल्यांकन किया गया है, जिनमें भारत समेत केवल पांच देश ही 'नियमित फॉलोअप’ की श्रेणी में रखे गए हैं। वहीं, समूह के अन्य देशों को 'अधिक फॉलोअप' की श्रेणी में रखा गया है। एक देश को ‘निगरानी सूची’ में रखा गया है। एफएटीएफ अपने सदस्य देशों को चार में से किसी एक श्रेणी में रखता है। इनमें नियमित फॉलोअप वाली श्रेणी सबसे ऊपर आती है।

177 में से 24 देश ही नियमित फॉलोअप में

एफएटीएफ के दायरे में शामिल 177 देशों में से भारत समेत केवल 24 देश ही 'नियमित फॉलोअप' में रखे गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, 'नियमित फॉलोअप' श्रेणी में रखने से संकेत मिलता है कि भारत को अनुशंसित कार्यों पर अक्टूबर 2027 में प्रगति रिपोर्ट पेश करने की जरूरत है। वहीं 'अधिक फॉलोअप' श्रेणी में शामिल देशों को हर साल आगे की कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट पेश करनी होगी। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, जर्मनी, फिनलैंड और डेनमार्क भी इस श्रेणी में रखे गए हैं।

भारत को यह करने की है जरूरत

एफएटीएफ ने कहा है कि भारत को कुछ गैर-वित्तीय क्षेत्रों में निवारक कदमों के पर्यवेक्षण और कार्यान्वयन को मजबूत करने की जरूरत है। इसने कहा कि भारत को मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण से संबंधित मुकदमों को अंजाम तक पहुंचाने में होने वाली देरी को दूर करने की जरूरत है। सूत्रों ने कहा, "कुल मिलाकर भारत का प्रदर्शन अनुकरणीय और संतोषजनक है। विविधतापूर्ण देश होने के कारण इसमें सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है।" एक उच्च पदस्थ सूत्र ने कहा, "विदेश में निवेश जुटाने वाली भारतीय कंपनियों को विस्तृत पृष्ठभूमि जांच और नियमित फॉलोअप में नहीं रखे गए देशों पर लागू होने वाले उन्नत पड़ताल उपायों से गुजरने की जरूरत नहीं होगी।" इस रिपोर्ट के बारे में कोई विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। रिपोर्ट अभी गोपनीय है और बाद में जारी की जाएगी।

(भाषा)

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