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आम आदमी की जेब होगी ढीली! खाने-पीने के सामान हो सकते हैं और महंगे, जानिए, क्यों

 Edited By: India TV Paisa Desk
 Published : Apr 17, 2022 02:34 pm IST,  Updated : Apr 17, 2022 02:34 pm IST

फिलहाल जीएसटी में 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत के चार कर स्लैब हैं। अधिकांश खाद्य वस्तुओं के लिए आठ प्रतिशत जीएसटी पर सहमति बनने की उम्मीद है।

GST- India TV Hindi
GST Image Source : FILE

Highlights

  • जीएसटी में पांच प्रतिशत के कर स्लैब को समाप्त करने पर विचार संभव
  • पांच प्रतिशत कर स्लैब को बढ़ाकर 7 या 8 या 9 प्रतिशत करने की चर्चा
  • कर स्लैब में 1% की वृद्धि से सालाना 50,000 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा

नई दिल्ली। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की अगले महीने होने वाली बैठक में पांच प्रतिशत के कर स्लैब को समाप्त करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है। सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए कहा कि इसके स्थान पर कुछ अधिक खपत वाले उत्पादों को तीन प्रतिशत और शेष को आठ प्रतिशत के स्लैब में डाला जा सकता है। ज्यादातर राज्य राजस्व बढ़ाने को लेकर एकराय रखते हैं, जिससे उन्हें मुआवजे के लिए केंद्र पर निर्भर नहीं रहना पड़े। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कर स्लैब में यह बदलाव होता है तो खाने-पीने के सामान के दाम बढ़ेंगे जो महंगाई में आम आदमी की जेब और ढीली करने का काम करेंगे। फिलहाल जीएसटी में 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत के चार कर स्लैब हैं। इसके अलावा, सोने और स्वर्ण आभूषणों पर तीन प्रतिशत कर लगता है। इसके अतिरिक्त कुछ बिना ब्रांड (अनब्रांडेड) और बिना पैकिंग (अनपैक्ड) वाले उत्पाद हैं जिनपर जीएसटी नहीं लगता है। 

राजस्व बढ़ाने की तैयारी में सरकार 

सूत्रों ने कहा कि राजस्व बढ़ाने के लिए परिषद कुछ गैर-खाद्य वस्तुओं को तीन प्रतिशत स्लैब में लाकर कर छूट प्राप्त वस्तुओं की सूची में कटौती करने का निर्णय ले सकती है। सूत्रों ने कहा कि पांच प्रतिशत स्लैब को बढ़ाकर 7 या 8 या 9 प्रतिशत करने की चर्चा चल रही है। इसपर अंतिम निर्णय जीएसटी परिषद द्वारा लिया जाएगा। केंद्रीय वित्त मंत्री की अगुवाई वाली जीएसटी परिषद में सभी राज्यों के वित्त मंत्री शामिल हैं। गणना के अनुसार, पांच प्रतिशत स्लैब में प्रत्येक एक प्रतिशत की वृद्धि (जिसमें मुख्य रूप से पैकेज्ड खाद्य पदार्थ शामिल हैं) से मोटे तौर पर सालाना 50,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। 

आठ फीसदी कर स्लैब में लाने की योजना 

हालांकि, विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, लेकिन माना जा रहा है कि परिषद में अधिकांश वस्तुओं के लिए आठ प्रतिशत जीएसटी पर सहमति बनने की उम्मीद है। फिलहाल इन उत्पादों पर जीएसटी की दर पांच प्रतिशत है। जीएसटी के तहत आवश्यक वस्तुओं पर या तो सबसे कम कर लगाया जाता है या उन्हें कर से पूरी छूट मिलती है। वहीं विलासिता और अहितकर वस्तुओं पर सबसे अधिक कर लगता है। इनपर 28 प्रतिशत कर के साथ उपकर भी लगता है। इस उपकर संग्रह का इस्तेमाल राज्यों को जीएसटी को लागू करने से राजस्व में हुए नुकसान की भरपाई के लिए किया जाता है। 

जून में जीएसटी मुआवजा व्यवस्था समाप्त हो जाएगी 

जून में जीएसटी मुआवजा व्यवस्था समाप्त होने जा रही है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि राज्य आत्मनिर्भर बनें और जीएसटी संग्रह में राजस्व अंतर की भरपाई के लिए केंद्र पर निर्भर नहीं रहें। परिषद ने पिछले साल कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई की अध्यक्षता में राज्यों के मंत्रियों की एक समिति गठित की थी, जो कर दरों को तर्कसंगत बनाकर और कर ढांचे में विसंगतियों को दूर करके राजस्व बढ़ाने के तरीके सुझाएगी। मंत्रियों का समूह अगले महीने की शुरुआत में अपनी सिफारिशें दे सकता है। जीएसटी परिषद की अगली बैठक मई के मध्य में होने की संभावना है, जिसमें मंत्री समूह की सिफारिशों को रखा जा सकता है। 

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