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IDFC First Bank Fraud: हरियाणा सरकार के खाते में जमा हुए 556 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री ने विधानसभा में दी जानकारी

 Reported By: Puneet Pareenja, Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Feb 24, 2026 12:48 pm IST,  Updated : Feb 24, 2026 12:48 pm IST

मुख्यमंत्री ने बताया कि वित्त सचिव की अध्यक्षता में हाई लेवल कमेटी बनाई गई है, जो इस मामले कि जांच करेगी और ये भी सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में कभी भी ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले की जांच करेगी हाई लेवल कमेटी Image Source : HTTPS://X.COM/NAYABSAINIBJP

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने मंगलवार को IDFC First Bank घोटाले के मामले मे विधानसभा में कुछ अहम जानकारियां दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक फ्रॉड मामले में 24 घंटे के भीतर सारे पैसों की रिकवरी हो गई और ये पैसे सरकार के खाते में जमा भी हो गए हैं। उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार के खाते में 556 करोड़ रुपये जमा हुए हैं। इसके अलावा, 22 करोड़ रुपये का ब्याज भी सरकार के खाते में जमा कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि चंडीगढ़ स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की ब्रांच के मिडल और लोअर कर्मचारियों ने मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया था।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले की जांच करेगी हाई लेवल कमेटी

मुख्यमंत्री ने विधानसभा में भरोसा दिलाया कि इस मामले में शामिल बड़े-से-बड़े अधिकारी को भी बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि वित्त सचिव की अध्यक्षता में हाई लेवल कमेटी बनाई गई है, जो इस मामले कि जांच करेगी और ये भी सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में कभी भी ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो। नायब सैनी ने कहा कि आज हरियाणा की शासन प्रणाली बदली हुई है, अब वो दौर नहीं है जब घोटालों को भी दबा दिया जाता था।

रविवार को हुआ था घोटाले का खुलासा

बताते चलें कि IDFC First Bank ने रविवार को 590 करोड़ रुपये के घोटाले की जानकारी दी थी। इस मामले में कई शिकायतें दर्ज की गई हैं। इस पूरे मामले में बैंक ने अपने कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराया था। अब इस मामले में हरियाणा स्टेट विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने भी FIR दर्ज कर ली है। बैंक अधिकारियों, पब्लिक सर्वेंट्स और मामले से सीधे तौर पर जुड़े अन्य व्यक्तियों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1988 के सेक्शन 13(2) BNS (भारतीय न्याय संहिता) के सेक्शन 316(5), सेक्शन 318(4), सेक्शन 336(3), सेक्शन 338 , सेक्शन 340(2), सेक्शन 61 (2) के तहत FIR दर्ज की गई है।

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