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आपात स्थिति में भी देशवासियों को घबराने की जरूरत नहीं, अनाज के हैं पर्याप्त भंडार: शिवराज सिंह चौहान

Edited By: Sourabha Suman @sourabhasuman Published : May 10, 2025 02:36 pm IST, Updated : May 10, 2025 02:43 pm IST

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि देश के नागरिक पूरी तरह निश्चिंत रहें। हम सक्षम हैं, सजग हैं और संकल्पित हैं। सीमाओं पर हमारे जवान डटे हैं और खेतों में हमारे किसान पसीना बहा रहे हैं।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान।- India TV Paisa
Photo:FILE कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान।

भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार बढ़ रहे सैन्य तनाव को देखते हुए देश के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देशवासियों को भरोसा देते हुए कहा है कि आपको अनाज के लिए घबराने की जरूरत नहीं है। सीमा पर जवान और खेतों में किसान तैयार हैं। हमारे अन्न भंडार पूर्ण हैं। इस वर्ष बंपर उत्पादन हुआ है और आने वाली फसलों के लिए भी स्थितियां भी अनुकूल हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति या आवश्यकता के समय देशवासी निश्चिंत रहें। हम तैयार हैं, सक्षम हैं और देश सेवा के लिए संकल्पित हैं।

खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी

खबर के मुताबिक, चौहान ने एक कार्यक्रम में कहा कि कृषि विभाग के रूप में हमारी जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। आपको बताना चाहूंगा हमारे गोदाम गेहूं, चावल और दूसरे अनाजों से भरे हुए हैं। किसी भी देशवासी को बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के नागरिक पूरी तरह निश्चिंत रहें। हम सक्षम हैं, सजग हैं और संकल्पित हैं। सीमाओं पर हमारे जवान डटे हैं और खेतों में हमारे किसान पसीना बहा रहे हैं। यह नए भारत की तस्वीर है।

अनाज का निर्यात

भारत ने वित्त वर्ष 2025 में दिसंबर तक 2.97 करोड़ अमेरिकी डॉलर मूल्य के मोटे अनाज का निर्यात किया और 2020-21 से इसके निर्यात में लगातार वृद्धि हो रही है। वित्तीय वर्ष 2020-21 से मोटे अनाज के निर्यात में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने बताया कि 2020-21 में यह निर्यात 2.60 करोड़ अमेरिकी डॉलर था, जो 2021-22 में बढ़कर 2.85 करोड़ अमेरिकी डॉलर और 2022-23 में 3.98 करोड़ अमेरिकी डॉलर हो गया।

बता दें, वित्त वर्ष 2025 के लिए बजट-पूर्व दस्तावेज में अनाज के अधिक उत्पादन को हतोत्साहित करने तथा दलहन एवं खाद्य तेलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए नीतिगत सुधार करने का सुझाव दिया गया है। देश दलहन और खाद्य तेलों की जरूरतों को पूरा करने के लिए फिलहाल आयात पर निर्भर है। आर्थिक समीक्षा 2024-25 में इस बात पर जोर दिया गया है कि विभिन्न विकास पहल के बावजूद भारत के कृषि क्षेत्र में आगे विकास की अपार क्षमता है जिसका अभी तक उपयोग नहीं किया जा सका है।

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