नई दिल्ली। नकदी संकट से जूझ रही सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) ने दूसरी कंपनियों को दिए गए कामकाज (आउटसोर्स) को तर्कसंगत बनाने के लिए प्रक्रिया शुरू की है। इससे बीएसएनएल को सालाना 200 करोड़ रुपए तक की बचत हो सकती है। इसके अलावा बीएसएनएल बिजली बिलों को भी तर्कसंगत बनाने का प्रयास कर रही है ताकि लागत में 15 प्रतिशत की बचत की जा सके।
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बीएसएनएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक पी के पुरवार ने कहा कि कंपनी की मासिक आय और व्यय (परिचालन खर्च और वेतन) के बीच का अंतर 800 करोड़ रुपए का है। उन्होंने कहा कि ऐसे में चुनौती कायम है। बीएसएनएल गंभीर नकदी संकट से जूझ रही है और हाल के समय इस साल दूसरी बार कर्मचारियों के वेतन भुगतान में विलंब हुआ है।
बीएसएनएल ने सोमवार को कहा था कि उसने कर्मचारियों के जुलाई माह का वेतन जारी कर दिया है। पुरवार ने कहा कि जुलाई माह के वेतन का भुगतान आंतरिक संसाधनों से किया गया है। उन्होंने कहा कि हम अपने परिचालन खर्च की समीक्षा करेंगे और जहां भी संभव होगा इसमें कमी लाने का प्रयास करेंगे। अभी हम दूसरी कंपनियों को ठेके पर दिए गए कामकाज की समीक्षा कर रहे हैं, जिससे इन्हें सुसंगत बनाया जा सके। हम देखना चाहते हैं कि इसमें से कितना कामकाज ‘इन-हाउस’ किया जा सकता है।
पुरवार ने कहा कि कंपनी को उम्मीद है कि इससे सालाना 100 से 200 करोड़ रुपए की बचत की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि बीएसएनएल के आउटसोर्स कामकाज में ऑप्टिकल फाइबर केबल रखरखाव से लेकर केबल की मरम्मत का कामकाज शामिल है।