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Govatsa Dwadashi 2026: कल मनाया जाएगा गोवत्स द्वादशी (वाघ बारस) का त्योहार, जानें शुभ मुहूर्त और सरल पूजा विधि

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Nov 04, 2026 07:28 am IST,  Updated : Nov 04, 2026 07:29 am IST

हिंदू पंचांग के अनुसार गोवत्स द्वादशी का पावन पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन गौ माता की पूजा होती है। यहां आप जानेंगे गोवत्स द्वादशी यानी वाघ बारस की सरल पूजा विधि।

गोवत्स द्वादशी (वाघ बारस)- India TV Hindi
गोवत्स द्वादशी (वाघ बारस) 2026 Image Source : INDIA TV

गोवत्स द्वादशी को वाघ बारस और वसु बारस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग गायों और बछड़ों की पूजा करते हैं। इस बार यह पावन पर्व 5 नवंबर को रमा एकादशी के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन गृहस्थ स्त्रियां संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। यह पर्व धनतेरस से एक दिन पहले मनाया जाता है। इस दिन गाय का दूध और उससे निर्मित पदार्थों का सेवन नहीं किया जाता है क्योंकि यह गो माता के विश्राम का दिन होता है। चलिए अब जानते हैं इस दिन की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त।

गोवत्स द्वादशी पूजा मुहूर्त 2026

गोवत्स द्वादशी की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05:33 से रात 08:10 बजे तक रहेगा। वहीं द्वादशी तिथि 5 नवंबर की सुबह 10:35 से 6 नवंबर की सुबह 10:30 बजे तक रहेगी।

गोवत्स द्वादशी चौघड़िया मुहूर्त 2026

  • शुभ - उत्तम - 06:36 AM से 07:58 AM
  • लाभ - उन्नति - 12:04 PM से 01:27 PM
  • अमृत - सर्वोत्तम - 01:27 PM से 02:49 PM
  • शुभ - उत्तम - 04:11 PM से 05:33 PM
  • अमृत - सर्वोत्तम - 05:33 PM से 07:11 PM

गोवत्स द्वादशी पूजा विधि

  • इस दिन गायों और बछड़ों को पवित्र जल से स्नान कराया जाता है।
  • फिर उनके माथे पर सिंदूर लगाया जाता है।
  • लेकिन अगर गौमाता न मिले तो परेशान होने की जरूरत नहीं है इसके लिए आप मिट्टी से गाय व बछड़े की मूर्ति बनाकर उसकी पूजा कर सकते हैं।
  • फिर इन मूर्तियों पर कुमकुम और हल्दी अर्पित की जाती है।
  • फिर शाम में गौमाता की विधि विधान पूजा और आरती की जाती है।
  • इसके बाद गाय को मूंग, गेहूं समेत कई चीजों का भोग लगाया जाता है।
  • इस दिन भगवान कृष्ण की भी पूजा का विधान है इसलिए उनकी पूजा भी जरूर करें। 

गोवत्स द्वादशी का महत्व

कहते हैं इस दिन भगवान कृष्ण और गायों की पूजा करने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। साथ ही घर में सुख समृद्धि का आगमन होता है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। ऐसी भी मान्यता है कि यदि कोई संतानहीन महिला इस व्रत को श्रद्धा से रखती है तो उसे जल्द ही संतान सुख की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान दत्तात्रेय के अवतार श्री वल्लभ की पूजा भी की जाती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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