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हथेली में मंगल पर्वत खोलता है साहस और शक्ति के राज, जानें किस स्थान से पता चलते हैं व्यक्ति के गुण!

 Written By: Arti Azad
 Published : Oct 20, 2026 11:19 pm IST,  Updated : Oct 20, 2026 11:19 pm IST

सामुद्रिक शास्त्र में हथेली के पर्वतों का विशेष महत्व बताया गया है। इनमें मंगल पर्वत को साहस और शक्ति से जोड़कर देखा जाता है। हथेली में इसकी स्थिति और बनावट से जुड़े कई दिलचस्प संकेत बताए गए हैं। आखिर मंगल पर्वत के ये संकेत क्या कहते हैं, चलिए जानते हैं इस बारे में।

Mount of Mars in Palmistry- India TV Hindi
मंगल पर्वत से जानें व्यक्तित्व के संकेत Image Source : PEXELS

सामुद्रिक शास्त्र में हथेली की रेखाओं के साथ पर्वतों का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि हथेली में मौजूद मंगल पर्वत व्यक्ति के साहस, बल, शक्ति और बुद्धि से जुड़े गुणों के संकेत देता है। हथेली में मंगल पर्वत के दो स्थान होते हैं और दोनों का अपना अलग महत्व है। इनकी बनावट और उन्नति से व्यक्ति के साहस, बुद्धि, धैर्य और संयम जैसे गुणों के बारे में जानकारी मिलती है। आइए जानते हैं मंगल पर्वत कहां स्थित होता है और इसके अलग-अलग स्थानों से व्यक्ति के किन गुणों का आकलन किया जाता है।

हथेली में कहां होते हैं मंगल पर्वत के दो स्थान?

सामुद्रिक शास्त्र में हथेली में मंगल पर्वत के दो स्थान बताए गए हैं। पहला हथेली में जीवन रेखा के पास होता है, जबकि दूसरा स्थान इसके ठीक विपरीत हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा के बीच स्थित होता है। मान्यता है कि मंगल पर्वत इन दोनों में से किसी एक स्थान पर या दोनों जगह उभरा हुआ हो सकता है। इसकी स्थिति और बनावट को व्यक्ति के अलग-अलग गुणों से जोड़कर देखा जाता है।

पहला मंगल पर्वत बताता है शारीरिक अवस्था

मंगल पर्वत का पहला स्थान व्यक्ति की शारीरिक अवस्था से संबंधित माना जाता है। इस स्थान के आधार पर उसके साहस, बल और शक्ति का आकलन किया जाता है। अगर यहां मंगल पर्वत सुंदर और उन्नत दिखाई दे, तो इसे व्यक्ति के साहसी और शक्तिशाली होने का संकेत कहा है। मान्यता है कि इस तरह का मंगल पर्वत व्यक्ति के सेना में होने या किसी उच्च पद पर आसीन होने से भी जुड़ा हो सकता है। इसके साथ ही इसे एक अच्छा अधिकारी बनने के संकेत के रूप में भी देखा जाता है।

दूसरा मंगल पर्वत देता है मानसिक गुणों के संकेत

मंगल पर्वत का दूसरा स्थान हथेली में हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा के बीच होता है। सामुद्रिक शास्त्र में इसे व्यक्ति की मानसिक अवस्था से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस स्थान की बनावट के आधार पर व्यक्ति की बुद्धि से जुड़े गुणों का आकलन किया जाता है। अगर यहां मंगल पर्वत उन्नत हो, तो इसे धैर्य, शौर्य, संयम और क्षमा जैसे गुणों का संकेत माना जाता है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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