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'इतनी फोर्स मंगाऊंगा कि ठंडा कर दूंगा, गोरखपुर पुलिस है ये', विश्वविद्यालय में चौकी प्रभारी का वीडियो वायरल

 Written By: India TV UP Bureau Desk
 Published : Sep 09, 2026 12:15 pm IST,  Updated : Sep 09, 2026 01:43 pm IST

गोरखपुर यूनिवर्सिटी में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्र नेताओं के बीच चौकी इंचार्ज ने जो कुछ कहा, उसका वीडियो अब वायरल हो रहा है। मामला तूल पकड़ता हुआ नजर आ रहा है।

Gorakhpur University chauki incharge- India TV Hindi
चौकी इंचार्ज गोरखपुर विश्वविद्यालय Image Source : REPORTER INPUT

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्र नेताओं और असिस्टेंट प्रॉक्टर के बीच हुए हंगामे को शांत करवाने पहुंची पुलिस का छात्रों के ऊपर चिल्लाने का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में विश्वविद्यालय पुलिस चौकी प्रभारी अविरल मिश्रा छात्रों पर चिल्लाते दिख रहे हैं। उन्होंने छात्रों से कहा कि ये शांतिपूर्ण तरीके का आंदोलन नहीं है, छात्र काॅलर पकड़ने पर उतर आ रहे हैं। ये शांतिपूर्ण धरना है? यही नियम है, धरने का? इतनी फोर्स मंगाऊंगा, इतनी फोर्स मंगाऊंगा कि ठंडा कर दूंगा, बता दे रहा हूं, गोरखपुर पुलिस है ये। 

वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस की ओर से रखा गया अपना पक्ष

सोशल मीडिया पर दरोगा का चिल्लाते हुए वीडियो सामने आया तो गाेरखपुर पुलिस की ओर से इस पर अपना पक्ष रखा गया। वायरल वीडियो के जवाब में पुलिस ने लिखा है कि 8 सितंबर 2026 को गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में धरने पर बैठे निष्कासित छात्रों से प्रॉक्टर और अन्य अधिकारियों की बातचीत चल रही थी। इसी दौरान कुछ छात्र उग्र हो गए और प्रॉक्टर से अभद्रता करते हुए धक्का-मुक्की और मारपीट का प्रयास करने लगे। मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और प्रॉक्टर को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर माहौल शांत कराया। इस पूरे प्रकरण में जांच एवं आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है।

हंगामा क्यों हुआ, इसकी वजह जानिए

दरअसल मंगलवार को गोरखपुर विश्वविद्यालय में मंगलवार दोपहर छात्र नेताओं और असिस्टेंट प्रॉक्टर के बीच कहासुनी हो गई। प्रशासनिक भवन के नीचे भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता सतीश प्रजापति और उज्जवल सिंह से असिस्टेंट प्रॉक्टर वेद प्रकाश राय बातचीत करने पहुंचे। इस दौरान दोनों के बीच स्थिति बिगड़ गई। मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, धक्का-मुक्की के दौरान कुछ छात्र नेता नीचे गिर गए। मामला बढ़ता देख विश्वविद्यालय और पुलिस प्रशासन के लोग मौके पर पहुंच गए। छात्रों के बीच घिरे असिस्टेंट प्रॉक्टर को गार्ड वहां से निकालकर उनके ऑफिस तक ले गए। हंगामे के बाद छात्र नेता दोबारा अनशन पर बैठ गए। उनका कहना है कि मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

बातचीत के दौरान बिगड़ा माहौल

घटना मंगलवार दोपहर करीब ढाई बजे की है। डीडीयू के असिस्टेंट प्रॉक्टर वेद प्रकाश राय प्रशासनिक भवन के नीचे पहुंचे थे। यहां सतीश प्रजापति और उज्जवल सिंह भूख हड़ताल पर बैठे थे। असिस्टेंट प्रॉक्टर ने छात्र नेताओं से उनकी मांगों को लेकर बातचीत की। छात्र नेताओं ने अपनी मांगें उनके सामने रखीं, लेकिन बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। इसी बीच बहस बढ़ गई। वहां मौजूद लोगों के मुताबिक, कुछ ही देर में धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। वीडियो में कुछ छात्र नेताओं के नीचे गिरने के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान असिस्टेंट प्रॉक्टर को छात्रों के बीच से निकलते हुए देखा गया। स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए गार्ड उन्हें वहां से लेकर प्रशासनिक भवन में स्थित उनके ऑफिस तक पहुंचे।

25 अगस्त से चल रहा है आंदोलन

छात्र नेताओं का आंदोलन 25 अगस्त से प्रशासनिक भवन के सामने चल रहा है। शुरुआत में छात्र नेता धरने पर बैठे थे। मांगों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए 5 सितंबर से आंदोलन को भूख हड़ताल में बदल दिया गया। छात्र नेता सतीश प्रजापति पिछले चार दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लेता, आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि नए कुलपति से उन्हें समस्याओं के समाधान की उम्मीद है।

निष्कासित छात्रों की बहाली की मांग

छात्र नेताओं की प्रमुख मांगों में विश्वविद्यालय से निष्कासित छात्रों की बहाली शामिल है। उनका आरोप है कि अपनी बात रखने और छात्र समस्याओं को उठाने वाले छात्रों के खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई की गई। वे इस कार्रवाई को वापस लेने और छात्रों को दोबारा पढ़ाई का मौका देने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग भी उठाई गई है। छात्र नेताओं का कहना है कि लंबे समय से चुनाव नहीं हुए हैं, जबकि छात्रों से छात्रसंघ शुल्क लिया जा रहा है।

हॉस्टल से लेकर पीएम-उषा के काम तक सवाल

छात्र नेताओं ने छात्रावासों में मेस और दूसरी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति सुधारने की मांग भी की है। उनका कहना है कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण भोजन और जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए। वहीं, पीएम-उषा योजना के तहत विश्वविद्यालय में कराए जा रहे कार्यों को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की गई है। छात्र नेताओं का कहना है कि योजना के तहत कामों का आवंटन किस आधार पर हो रहा है, इसकी जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की जानी चाहिए।

परीक्षा एजेंसी और डिग्री के नाम पर वसूली की जांच

छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय में काम कर रही परीक्षा एजेंसी की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही डिग्री और अंकपत्र के नाम पर छात्रों से कथित तौर पर पैसे लिए जाने के आरोपों की जांच की मांग की गई है। उनका कहना है कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो।

गोरखपुर से राज श्रीवास्तव की रिपोर्ट 

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