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नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत, जेल से बाहर आकर लड़ेंगे चुनाव

 Written By: Dhyanendra Chauhan
 Published : Sep 29, 2026 11:59 am IST,  Updated : Sep 29, 2026 12:24 pm IST

नंदीग्राम उपचुनाव सीट से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को जमानत मिल गई है। कोर्ट ने मिलन प्रधान को तीन हफ्ते के लिए अंतरिम जमानत दी है। मिलन प्रधान अब जेल से बाहर आकर चुनाव लड़ेंगे।

कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान- India TV Hindi
कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान Image Source : FACEBOOK/SUPRIYASHRINATE

पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव है। यहां से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने मिलन प्रधान को छह मामलों में 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दे दी है। मिलन प्रधान को 20 हजार रुपये के बेल बॉन्ड पर जमानत मिली है।

अब जेल से बाहर आकर लड़ेंगे चुनाव

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद मिलन प्रधान जेल से बाहर आकर नंदीग्राम उपचुनाव में चुनाव लड़ेंगे। 6 मामलों में अंतरिम जमानत मिलने से उनके चुनाव प्रचार में शामिल होने का रास्ता भी साफ हो गया है। मिलन प्रधान नंदीग्राम विधानसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। उनके खिलाफ दर्ज छह मामलों में हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत दी है। नंदीग्राम उपचुनाव अब काफी दिलचस्प होने वाला है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश का माहौल है। 

तीन सप्ताह यानी 21 अक्टूबर तक मिली है जमानत

कलकत्ता हाई कोर्ट ने कांग्रेस के नंदीग्राम उपचुनाव उम्मीदवार मिलन प्रधान को तीन सप्ताह के लिए, 21 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि उन्हें नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद ही हिरासत में लिया गया था और उनके खिलाफ मामले 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े हैं। 

6 अक्टूबर को है नंदीग्राम उपचुनाव

न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने प्रधान की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसमें उन्होंने 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम उपचुनाव में चुनाव लड़ने और प्रचार करने में सक्षम होने के लिए अंतरिम जमानत की मांग की थी।

कोर्ट में नहीं पेश किए गए कोई सबूत

कोर्ट ने गौर किया कि प्रधान नामांकन पत्र दाखिल करते समय हिरासत में नहीं थे और बाद में उन्हें गिरफ्तार किया गया। कोर्ट ने यह भी पाया कि राज्य ने ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया जिससे यह साबित हो सके कि प्रधान 2007 के बाद किसी अपराध के संबंध में वांछित थे। कोर्ट ने यह भी कहा कि मुकदमों का आधार बनने वाली पूरी घटना की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा की गई थी। कोर्ट ने पाया कि प्रधान एक राजनीतिक कार्यकर्ता थे जिन्होंने 2007 के आंदोलन में भाग लिया था और वे अभी भी एक राजनीतिक कार्यकर्ता हैं।

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