1. Hindi News
  2. विदेश
  3. एशिया
  4. हैबतुल्ला बना अफगान तालिबान का नया नेता, मुल्ला मंसूर का था बॉडीगार्ड

हैबतुल्ला बना अफगान तालिबान का नया नेता, मुल्ला मंसूर का था बॉडीगार्ड

 Written By: Bhasha
 Published : May 25, 2016 08:25 pm IST,  Updated : May 25, 2016 09:19 pm IST

काबुल: अफगान तालिबान ने एक अमेरिकी ड्रोन हमले में अपने पूर्व नेता मुल्ला अख्तर मंसूर के मारे जाने की आधिकारिक तौर पर पुष्टि करने के बाद हैबतुल्ला अखुंदजादा को अपना नया नेता नियुक्त किये जाने

akhundzada- India TV Hindi
akhundzada

काबुल: अफगान तालिबान ने एक अमेरिकी ड्रोन हमले में अपने पूर्व नेता मुल्ला अख्तर मंसूर के मारे जाने की आधिकारिक तौर पर पुष्टि करने के बाद हैबतुल्ला अखुंदजादा को अपना नया नेता नियुक्त किये जाने की आज घोषणा की। इस घोषणा के समय ही काबुल के नजदीक एक शक्तिशाली आत्मघाती बम विस्फोट हुआ जिसमें अदालत के कम से कम 10 कर्मचारी मारे गये। फिलहाल इस हमले की जिम्मेदारी किसी भी समूह ने नहीं ली है।

मंसूर के दो सहायकों में से एक अखुंदजादा को खंडित उग्रवादी संगठन में मान्य नेता की तरह देखा जा रहा है हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि क्या वह 15 वर्ष के इस विद्रोह को खत्म करने के उद्देश्य के लिए वार्ता के पक्ष में रहेगा या नहीं। आतंकवादी संगठन ने एक बयान में कहा, हैबतुल्ला अखुंदजादा को शूरा (सर्वोच्च परिषद) में सर्वसम्मति से इस्लामी अमीरात (तालिबान) का नया नेता नियुक्त किया गया है और शूरा के सभी सदस्यों ने उसके प्रति वफादारी का संकल्प लिया है।

इसमें कहा गया है कि अमेरिकी बलों के कट्टर शत्रु सिराजुद्दीन हक्कानी और तालिबान संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे मुल्ला याकूब को नए नेता का सहायक नियुक्त किया गया है।

बयान में कहा गया, पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक अमेरिकी ड्रोन हमले में अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात का नेता मुल्ला अख्तर मंसूर शहीद हो गया है। तालिबान की ओर से उसकी मौत की यह पहली पुष्टि है।

ड्रोन हमले की इजाजत देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सोमवार को मंसूर के मौत की पुष्टि की थी। उन्होंने कहा कि मंसूर गंभीरता से शांति वार्ता में शामिल होने के प्रयासों को अस्वीकृत कर दिया था। उन्होंने कहा कि संघर्ष को समाप्त करने का एक ही रास्ता है और वह है अफगान सरकार से सीधी बातचीत। तालिबान विशेषग्य रहीमुल्ला यूसुफजई ने एएफपी को बताया कि अखुंदजादा की नियुक्ति के बाद यथास्थिति में काई परिवर्तन नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा, मुझे मंसूर की किसी भी नीति में बदलाव की उम्मीद नहीं है। उसके (अखुंदजादा) अफगान सरकार के साथ बातचीत करने की उम्मीद नहीं है। अन्य पर्यवेक्षकों का कहना है कि अखुंदजादा को एक सैन्य कमांडर से ज्यादा एक धार्मिक व्यक्ति के रूप में देखा जाता है। विश्लेषक आमिर राणा ने कहा, अगर वह शांति वार्ता का समर्थन करता है तो भी सर्वोच्च परिषद की आम सहमति के बिना उसके आगे बढ़ने की संभावना नहीं है। परिषद में कई वार्ता के सख्त खिलाफ हैं।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Asia से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें विदेश