बीजिंग: परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में प्रवेश के भारत के प्रयासों के बीच चीन ने सोमवार को कहा कि 48 देशों का समूह 24 जून को सोल में आयोजित होने वाले पूर्ण अधिवेशन से पहले नए सदस्य देशों को शामिल करने के बारे में विस्तृत विचार-विमर्श करेगा।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग से जब पूछा गया कि क्या समूह सोल की बैठक में कोई फैसला कर सकता है, उन्होंने यहां मीडिया ब्रीफिंग में कहा, परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले देश एनएसजी में कैसे शामिल हो सकते हैं, इस पर समूह विस्तृत विचार-विमर्श करेगा। चीन ने रविवार को कहा था कि नौ जून को एनएसजी चेयर अर्जेंटीना के राजदूत रफेल मरियानो ग्रॉसी द्वारा वियना में बुलाई गई बैठक में नए सदस्यों को शामिल करने के बारे में कोई बातचीत नहीं हुई।
मंत्रालय ने रविवार को कहा था, चेयर ने कहा कि इस बैठक का कोई एजेंडा नहीं है और यह केवल सभी पक्षों की राय सुनने के लिए तथा 24 जून को सोल में एनएसजी के पूर्ण सत्र में जमा की जाने वाली रिपोर्ट तैयार करने के लिए बुलाई गई। अमेरिका और 48 सदस्यीय समूह के अधिकतर देश जहां भारत की इस समूह की सदस्यता का समर्थन करते हैं, वहीं ऐसी खबरें हैं कि न्यूजीलैंड, आयरलैंड, तुर्की, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रिया के साथ चीन इस संगठन में भारत के प्रवेश के खिलाफ हैं।
समूह में पाकिस्तान के प्रवेश का समर्थन कर रहे चीन का कहना है कि समूह में एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले सदस्यों को शामिल करने को लेकर आम-सहमति होनी चाहिए। जब पूछा गया कि चीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा को तथा भारत-अमेरिका के संयुक्त बयान में दक्षिण चीन सागर के मुद्दे का कोई उल्लेख नहीं होने को कैसे देखता है तो लू ने समुद्री विवाद को सुलझाने के चीन और अन्य पूर्वी एशियाई देशों के प्रयासों को रेखांकित करते हुए कहा, भारत हमेशा से स्वतंत्रता की कूटनीतिक नीति को कायम रखता है। हमारा मानना है कि भारत ने अपने खुद के हितों की रोशनी में स्वतंत्रता से इसे चुना। चीन लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर दावा करता है वहीं वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रूनेई और ताईवान का दावा इसके विपरीत है।
चीन के नेतृत्व वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के इस महीने के अंत में ताशकंद में होने वाले सम्मेलन में भारत और पाकिस्तान के एससीओ में प्रवेश की औपचारिकताएं पूरी करने के बारे में पूछे जाने पर लू ने कहा, मैं सम्मेलन के नतीजे का पूर्वानुमान नहीं लगा सकता। लेकिन मुझे विश्वास है कि यह एक महत्वपूर्ण एजेंडा होगा। उन्होंने कहा, सभी नेता इस मुद्दे पर गहराई से चर्चा करेंगे और एससीओ के विस्तार की क्रमिक प्रगति सुनिश्चित करेंगे।
एससीओ महासचिव राशिद अलिमोव ने रूसी समाचार एजेंसी तास से यहां नौ जून को कहा था कि भारत और पाकिस्तान बीजिंग स्थित क्षेत्रीय सुरक्षा संस्थान एससीओ में शामिल होने पर सैद्धांतिक रूप से सहमति पर पहुंच गए हैं। एससीओ ने पिछले साल उफा में हुए सम्मेलन में नए सदस्यों के तौर पर भारत और पाकिस्तान के प्रवेश पर फैसले को मंजूरी दी थी। इस साल का सम्मेलन 23-24 जून को ताशकंद में होगा।