बीजिंग: चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) पर आई एक रिर्पोट के मुताबिक 50 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत से तैयार होने वाले विवादित आर्थिक गलियारे ने अप्रत्याश्ति प्रगति की है लेकिन चीन की कई कंपनियों ने पाकिस्तान के स्थानीय कानूनों और सामाजिक परंपराओं का उल्लंघन किया है, जिससे चीन की साख को क्षति पहुंची है। रेनमिन यूनिवर्सिटी ऑफ चाइना के चोंगयांग इंस्टीट्यूट फॉर फाइनेंशियल स्टडीज के झोउ रोंग और चेन शियाओचेन द्वारा लिखे लेख में कहा गया है, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) बेल्ट एंड रोड पहल में अहम भूमिका निभाएगा। संस्थान ने पाकिस्तान में CPEC के निर्माण से संबंधित प्रगति एवं समस्याओं पर हाल ही में एक गहन शोध कार्यक्रम शुरू किया था। (उत्तर कोरिया कर रहा है इस हथियार से अमेरिका को तबाह करने की कोशिश)
लेख में कहा गया है, मूल्यांकन के बाद हमने पाया कि निर्माण अप्रत्याशित तरीके से तेजी से किया ज रहा है। सहयोग के चार प्रमुख क्षेत्रों- उर्जा, यातायात ढ़ांचा, औद्योगिक सहयोग और ग्वादर बंदरगाह को तैयार करने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। लेख में कहा गया है कि हालांकि सीपीईसी आतंरिक और बाहरी कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहा है। निर्माण में तेजी से हो रही प्रगति ने तत्काल सफलता के प्रति उत्सुक कर दिया है।
इसमें कहा गया है, पाकिस्तान सरकार यह उम्मीद कर रही है कि ज्यादातर पावर स्टेशन और बुनियादी ढ़ांचा परियोजना अगले साल के चुनाव से पहले पूरी हो सकती है। हालांकि निर्माण कार्य के ठेकेदारों के मुताबिक यह संभव नहीं हो सकता। लेख के मुताबिक, पाकिस्तान में कुछ चीनी कंपनियों में खामियां भी हैं। वे दीर्घकालिक योजनाओं की अपेक्षा जल्दबाजी में सफलता पाना चाहती हैं। कई चीनी कंपनियों ने पाकिस्तान के कानून और स्थानीय सामाजिक परंपराओं का उल्लंघन किया है जिससे चीनी लोगों की साख को नुकसान पहुंचा है। इस लेख में कहा गया है कि इन समस्याओं का समाधान करने के लिए सीपीईसी को दीर्घकालिक योजना की जरूरत है।