बीजिंग: भारतीय और चीनी पुरातत्वविद भारत से चीन में बौद्ध धर्म के प्रसार का पता लगाने के लिए एक सांस्कृतिक सहयोग परियोजना पर चर्चा कर रहे हैं। अधिकारियों ने आज बताया कि समाज विज्ञान की चीनी अकादमी के तहत पुरातत्व संस्था सारनाथ, भारत में महत्वपूर्ण स्थलों पर भारतीय पुरातत्वों से तालमेल करेगी।
सारनाथ में बुद्ध ने दिया था पहला उपदेश
संस्थान के निदेशक वांग वेई ने बताया कि परियोजना के तहत खुदाई, सांस्कृतिक अवशेष संरक्षण और सुरक्षा निगरानी एवं नियंत्रण शामिल होने की संभावना है। उत्तर-पूर्वी भारत में सारनाथ में बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था और बौद्धों के लिए पवित्र स्थलों में इसे एक माना जाता है।
परियोजना नवंबर 2016 से 2020 तक चलेंगी
सरकारी शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने वांग के हवाले से कहा है, हम बेहद उत्साहित हैं क्योंकि हमारे पुरातत्वविद भारतीय अवशेषों को देख सकेंगे और संरक्षित कर पाएंगे जिसे केवल उन्होंने किताबों में देखा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तहत पुरातत्व संस्थान के निदेशक संजय कुमार मंजूल ने परियोजना के लिए जोरदार समर्थन किया है जिसके नवंबर में शुरू होने और 2020 तक चलने की उम्मीद है। यह भी उम्मीद की जा रही है कि इससे भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़ी बहुत सी जानकारियां सामने आ सकती हैं। साथ ही बुद्ध से जड़े पुरातात्विक महत्व के अवशेषों को बेहतर ढंग से संरक्षण किया जा सकेगा।