कोलंबो: श्रीलंका के एक मशहूर पत्रकार के शव को मंगलवार को कब्र से निकाला जाएगा। इस पत्रकार की वर्ष 2009 में गृह युद्ध के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। शव को कब्र से निकालने का मकसद उसकी मौत के बारे में नए सिरे से छानबीन करना है। एक मीडिया रिपोर्ट में सोमवार को यह जानकारी दी गई। गार्डिअन की खबर के अनुसार, कोलंबो में लासांत विक्रमातुंगे की कब्र तभी से सशस्त्र सुरक्षाकर्मियों के पहरे में है, जब से इस माह के शुरू में फिर से शव के अंत्य परीक्षण की घोषणा की गई है। देश के प्रमुख अखबार संडे के संपादक की हत्या के सिलसिले में दो माह पहले एक सैन्य खुफिया अधिकारी की हुई गिरफ्तारी के बाद इसकी घोषणा की गई है।
अदालत के दस्तावेजों अनुसार, जांच अधिकारियों ने आग्रह किया कि विक्रमातुंगे के शव को कब्र से फिर निकाला जाए क्योंकि उनकी मौत के समय की दो अलग-अलग चिकित्सकीय जांच रिपोर्ट परस्पर विरोधी परिणाम बताती हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक उनकी मौत का कारण गोली लगना है जबकि दूसरी रिपोर्ट में कहा गया है कि उनके शरीर पर गोली लगने का कोई निशान तक नहीं है।
विक्रमातुंगे को अपनी हत्या होने का पहले ही आभास हो गया था और उन्होंने एक संपादकीय लिखा था जो जनवरी 2009 में मोटरसाइकिल सवार बंदूकधारियों द्वारा उनकी हत्या के तीन दिन बाद प्रकाशित हुआ था। गार्डिअन और न्यूयार्कर पत्रिका में दोबारा प्रकाशित 2500 शब्दों वाले इस संपादकीय में उन्होंने लिखा था, "जब अंतत: मेरी हत्या की जाएगी तो वह सरकार ही होगी जो मेरी हत्या करेगी।"
तत्कालीन राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को सीधे संबोधित करते हुए विक्रमातुंगे ने लिखा था कि उनकी मौत के बाद तत्परतापूर्वक एक जांच की जाएगी लेकिन जिस तरह से पहले आपने (राजपक्षे ने) मामलों में जांच का आदेश दिया है, उन सभी जांचों की तरह इसमें भी कुछ सामने नहीं आएगा। राजपक्षे के उत्तराधिकारी मैत्रिपाला सिरिसेना ने पिछले साल जनवरी में सत्ता संभालने के बाद पत्रकार के हत्यारे को ढूंढ निकालने का प्रण लिया था। इस साल मार्च में सिरिसेना ने पत्रकारों के खिलाफ हिंसा के मामलों की जांच के लिए एक सचिव नियुक्त किया। इसमें विक्रमातुंगे की हत्या और कार्टूनिस्ट प्रगीत एकानालिगोडा के लापता होने का मामला भी शामिल है। प्रगीत को आखिरी बार वर्ष 2010 के जनवरी में देखा गया था।