
अलकायदा के नेता ने कहा है कि जेहाद को ठीक से न समझने वाला जेहादी मानवीय मनोविज्ञान को ठीक तरह से नहीं जानता है और यह सोचता है कि महिलाओं व बच्चों को निशाना बनाने से दुश्मन कमजोर हो सकता है।
उमर ने कहा कि, "इस तरह के कृत्यों से हमारे प्रति लोगों की घृणा बढ़ती है और दुश्मनों की संख्या में इजाफा होता है।" उमर भारत के देवबंद इस्लामिक सेमिनरी से स्नातक है और उसने अपना नाम बदलकर सनाउल्लाह हक रख लिया है। वह उत्तर प्रदेश के संभल का निवासी है।
माना जाता है कि साल 1995 में राज्य से लापता होने के बाद वह इस्लामिक आतंकवादी संगठन में शामिल हुआ। उसने कराची के जामिया उलूम से इस्लामिक अध्ययन की शिक्षा ली है।
उसने कहा है, "जेहाद को निर्दोषों के रक्त से मत जोड़िए। ऐसा करके आप सफल नहीं हो सकते। यही कारण है कि आपके दुश्मन आपसे यह चाहते हैं कि आप अपने आप से हार जाएं।"
आतंकवादी नेता ने अपने लड़ाकों को सलाह दी कि वे न्यायोचित ढंग से अपने संसाधनों का इस्तेमाल दुश्मन को अधिक से अधिक क्षति पहुंचाने के लिए करें।
लेकिन अपने ही सलाह के विपरीत उसने ओसामा बिन लादेन द्वारा नौ सितंबर, 2001 को अमेरिका पर हमले को आतंकवादी हमले का बेहतरीन उदाहरण करार दिया।